हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर हमला मामले में निचली अदालत को आरोप तय करने की अनुमति दे दी। इस मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई विधायकों को आरोपी बनाया गया है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू की एक एकल पीठ ने हाईकोर्ट के 14 मार्च 2019 के आदेश में संशोधन करते हुए निचली अदालत को आरोप तय करने की अनुमति दी। अंशु प्रकाश ने इस मामले में निचली अदालत के आदेश के खिलाफ मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की याचिका पर भी जल्द सुनवाई की मांग की है। निचली अदालत के 22 अक्तूबर 2018 के फैसले को चुनौती देते हुए मांग की गई कि इस मामले में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बजाय लोक अभियोजक को अभियोजन का पक्ष रखने का निर्देश दिया जाए।
हालांकिपीठ ने कहा कि याचिका 2 सितंबर के लिए सूचीबद्ध है, इसलिए इस पर पहले सुनवाई करना संभव नहीं है। वहीं, अंशु प्रकाश के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि समय बचाने के लिए अगर निचली अदालत में लोक अभियोजक द्वारा उनका पक्ष रखा जाए, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की ओर से पेश वकील दयान कृष्ण और एन हरिहरन ने भी सहमति इस पर दे दी।
यह मामला कथित रूप से 19 फरवरी 2018 को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास स्थान पर हुई घटना से जुड़ा है। मुख्यमंत्री आवास पर एक बैठक में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में अन्य विधायकों ने कथित रूप से अंशु प्रकाश पर हमला किया था। इस मामले में 25 अक्तूबर 2018 को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत अन्य 9 आरोपी विधायकों को जमानत मिल गई थी। वहीं दो अन्य आरोपी विधायकों अमानतुल्ला खान और प्रकाश जारवाल को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।