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जंतर-मंतर पर उतरी जमीयत, नागरिकता अधिनियम का विरोध

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते लोग। - फोटो : Ashram
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नई दिल्ली। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 के खिलाफ शुक्रवार को बड़ी संख्या में मुसलिम समुदाय के लोग जंतर-मंतर पर जुटे और प्रदर्शन किया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के बैनर तले इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने किया। ज्यादातर प्रदर्शनकारी नबी करीम इलाके से थे। नबी करीम इलाके से जंतर-मंतर पर मार्च निकाला था।
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प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर पकड़ रखे थे, जिस पर ‘हमें नहीं चाहिए सीएबी, सीएबी हमें मंजूर नहीं, देश के भाई चारे के खिलाफ है सीएबी, नागरिकता संशोधन बिल रद्द करो’ जैसे नारे लिखे हुए थे। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा भी लहराया। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि नागरिकता कानून देश के संविधान के खिलाफ है। यह धर्म के आधार पर लोगों को बांटता है। मदनी ने कहा कि यह लड़ाई की शुरुआत है। सवाल बिल पास होने का नहीं, मुसलमान कभी फायदे या नुकसान का हिसाब लगाकर हक के लिए आवाज बुलंद नहीं करते, बल्कि उनका ईमान उन्हें नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठाने की इजाजत देता है।
आखिर में मदनी ने केंद्र सरकार को सद्बुद्धि देने और देश का अमन चैन कायम रखने के लिए दुआ की। फिर प्रदर्शन स्थगित करने की बात करते हुए मदनी ने अपील की कि सभी प्रदर्शनकारी शांति पूर्वक अपने घर जाएं। कहीं भी कानून व्यवस्था को नहीं तोड़ना है। इसके बाद प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस होकर वापस लौट गए। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। इसमें राष्ट्रपति से अपील की गई कि वह इस अन्यायपूर्ण व सांप्रदायिकता के लक्ष्य को रोकने के लिए अपने प्रभाव का प्रयोग करें। वहीं, उच्चतम न्यायालय से जमीयत की अपील है कि अदालत इस निंदनीय कानून पर संज्ञान ले। इसके लागू होने से संविधान की मूल संरचना नष्ट हो जाएगी।
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असम के लोगों का प्रदर्शन, पूर्व मुख्यमंत्री हुए शामिल
असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई भी शुक्रवार को जंतर-मंतर पर पहुंचे। दिल्ली में रहने वाले असम के लोगों की तरफ से आयोजित प्रदर्शन में गोगोई शामिल हुए। उन्होंने नागरिकता कानून का विरोध करते हुए इसे असम को बांटने वाला कानून बनाया। गोगोई ने कहा कि कानून देश के संविधान के खिलाफ है। इससे देश की एकता और अखंडता को खतरा है। असम के लोग इस कानून को मानने से इंकार करते हैं।
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