नई दिल्ली। विदेशी कंपनियों से कारोबार के नाम पर अपने पार्टनर से 8.50 करोड़ रुपये (11.95 यूएस डॉलर) की ठगी के मामले में फरार तेज बहादुर रॉय उर्फ टीबी रॉय (51) को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार किया है। टेक्सटाइल इंजीनियर टीबी रॉय के खिलाफ ठगी के अलावा चेक बाउंस के कुल 39 मामले दर्ज हैं। वह वर्ष 2006 से फरार था। पांच अलग-अलग मामलों में उसे कोर्ट ने भगोड़ा घोषित किया हुआ था। फिलहाल वह मध्य प्रदेश और यूपी के सोनभद्र में माइन चला रहा था। लखनऊ के हजरतगंज में रामेश्वरम माइंस के नाम से इसका रजिस्टर्ड ऑफिस भी है।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त भीष्म सिंह ने बताया कि वर्ष 2003 में टीबी रॉय ने दिल्ली के सरोजनी नगर निवासी अश्विनी दीवान से 11.95 यूएस डॉलर ठग लिये थे। उसने अश्विनी को झांसा दिया कि उसे एक विदेशी कंपनी से घरेलू सामान भेजने का बड़ा ऑर्डर मिला है। इसे वह अकेले पूरा नहीं कर सकता। विदेशों में सामान भेजने के नाम पर उसने अश्विनी से साढ़े आठ करोड़ से अधिक की रकम ली।
ललित मिश्रा और संजय तिवारी के साथ मिलकर टीबी रॉय ने कई फर्जी कंपनियों में रुपये इधर से उधर कर गायब कर दिए। अश्विनी की शिकायत पर सरोजनी नगर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ। कोर्ट ने 12 दिसंबर 2013 को इस मामले में टीबी रॉय को भगोड़ा घोषित कर दिया। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि टीबी रॉय के खिलाफ इसी तरह के कई मामले लाजपत नगर, कृष्णा नगर, कालकाजी, न्यू फ्रेंड्स कालोनी और गोविंदपुरी थाने में दर्ज हैं।
स्थानीय पुलिस के साथ अपराध शाखा भी उसकी तलाश में थी। एसीपी अरविंद कुमार, इंस्पेक्टर दिनेश कुमार, एसआई अरुण सिंघु व अन्य की टीम ने एक सूचना के बाद शुक्रवार को लखनऊ के गोमती नगर से टीबी रॉय को दबोच लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह वाराणसी में चोलापुर का मूल निवासी है। दिल्ली के कालकाजी एक्सटेंशन में उसका अपना फ्लैट है। पोस्ट ग्रेजुएशन के अलावा उसने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की है। 2006 के बाद से वह कभी किसी कोर्ट में पेश नहीं हुआ।