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नर्सिंग यूनियन ने दिल्ली सरकार की योजना का किया विरोध

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नई दिल्ली। नर्सिंग यूनियनों ने दिल्ली सरकार की उस घोषणा का विरोध किया है, जिसमें सरकार ने कहा था कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए दिल्ली सरकार 5 हजार युवाओं को स्वास्थ्य सेवकों के रूप में प्रशिक्षित करेगी। यह युवा कोविड काल में अपनी सेवाएं देंगे और नर्सों व डॉक्टरों की सहायता करेंगे।
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दिल्ली नर्सिंग यूनियन के अध्यक्ष बी. एल. शर्मा ने कहा कि जब एक अस्पताल अनुबंध के आधार पर नर्सिंग स्टाफ को रखता है तो न्यूनतम योग्यता एक डिप्लोमा होती है। तीन साल के इस डिप्लोमा में नर्सिंग छात्र मानव शरीर के संरचना और अन्य चीजें सीखते हैं। सिर्फ 14 दिन के प्रशिक्षण में स्वास्थ्य सेवकों को तैयार करना एक हास्यास्पद बात है। ऐसा करने से लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार को भर्ती करनी ही है तो नर्सिंग स्टाफ की भर्ती करनी चाहिए। इन सेवकों को तैनात करके सरकार यह दिखाना चाहती है कि महामारी से निपटने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन हैं। यह कदम बिलकुल गलत है।
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दिल्ली सरकार ने घोषणा में कहा था कि 5 हजार स्वयं सेवकों को नर्सिंग, पैरामेडिकल, जीवनरक्षक उपाय, नमूना एकत्र करने का तरीका जैसे कामों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले 500 युवाओं का प्रशिक्षण जून के आखिरी सप्ताह से होगा।
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