दिल्ली के निजी स्कूलों में नर्सरी दाखिले की रेस जारी है। दाखिले की रेस में पड़ोस (दूरी) का मानक अभिभावकों को परेशान कर रहा है। दरअसल स्कूलों का दूरी को मापने का तरीका अलग-अलग है। स्कूलों ने जो अपने दाखिला मानक जारी किए हैं उनमें कुछ स्कूल बस रूट, कुछ एरिया तो कुछ गूगल मैप के आधार पर दूरी को माप रहे हैं। इस कारण बच्चे का घर नजदीक होने के बावजूद भी वह दूरी के अधिकतम अंकों से वंचित हो रहे हैं।
स्कूल अपने मानकों में पड़ोस (नेबरहुड-दूरी) के लिए 20 से 80 अंक तक दे रहे हैं। कुछ स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने इस मानक के लिए कॉलोनियों के नाम को शामिल किया है। पश्चिम विहार स्थित नियो कॉन्वेंट ने एरिया की लोकेशन और विकास पुरी स्थित ऑक्सफोर्ड सीनियर सैकेंडरी स्कूल ने एरिया के हिसाब से अंक तय किए हैं। मदर इंटरनेशनल स्कूल कॉलोनी से दूरी को माप रहा है। वहीं माउंट कॉरमेल बस रूट के हिसाब से दूरी को माप रहा है।
स्कूलों ने पड़ोस के मानक में जिन कॉलोनी को शामिल किया है, उसी के आधार पर बच्चे को अंक दे रहे हैं। जिन कॉलोनी में बच्चे रह रहे हैं वह स्कूलों की कॉलोनी की सूची में शामिल नहीं है। इस कारण से स्कूल के पास रहने के बाद भी उन्हें इस मानक के अंक नहीं मिल रहे हैं। वहीं कुछ कॉलोनी ऐसी हैं जहां से स्कूल और घर की दूरी काफी कम है, लेकिन स्कूल की बस का रूट उस कॉलोनी में नहीं है। इससे दूरी का दायरा ज्यादा हो रहा है। गूगल से दूरी मापने से इलाकों की दूरी अधिक हो रही है जबकि स्कूल के पास इलाका पड़ रहा है।
एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा कहते हैं कि दूरी मापने का सबसे प्रामाणिक तरीका गूगल मैप है। यह भेदभावपूर्ण नहीं है क्योंकि इसमें कोई हेरफेर नहीं किया जा सकता है। जबकि बस मार्ग और इलाके की दूरी से अंक देने का तरीका सही नहीं है क्योंकि इससे आसपास केक्षेत्रों में रहने वाले अभिभावकों के बच्चे भी अंकों से वंचित हो रहे हैं।