संसद में दिल्ली नगर निगम अधिनियम संशोधन विधेयक पास होने के बाद अब दिल्ली नगर निगम के नियुक्त किए जाने वाले प्रशासक और आयुक्त के नामों पर चर्चा आम हो गई है। इन दोनों पदों की कमान दिल्ली नगर निगम के कामकाज के संबंध में अनुभव रखने वाले पूर्व और वर्तमान नौकरशाहों को देने का कयास लगाए जा रहे हैं। इन पदों पर नगर निगम के आयुक्त एवं अतिरिक्त आयुक्त रहे अधिकारियों को नियुक्त करने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली नगर निगम के प्रशासक के तौर पर उसके दो पूर्व आयुक्त राकेश मेहता और केएस मेहरा के नामों की चर्चा प्रमुखता से चल रही है। नगर निगम के आयुक्त के तौर पर राकेश मेहता एवं केएस मेहरा का कार्यकाल काफी अच्छा रहा था। उनके कार्यकाल में नगर निगम ने कई ऐतिहासिक कार्य किए थे और नगर निगम में कई मामलों में काफी सुधार भी हुआ था। दिल्ली के गांव मुंडेला कलां निवासी केएस मेहरा नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त भी रहे थे।
दिल्ली के मुख्य सचिव एवं दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त रहे मूल रूप से गुजरात निवासी राकेश मेहता की मंगलवार को राज्यसभा में भी खूब चर्चा हुई थी। दिल्ली नगर निगम अधिनियम संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा के एक सांसद ने दिल्ली नगर निगम के अनुभव के संबंध में जमकर तारीफ की थी। इस कारण नगर निगम के प्रशासक के तौर पर उनका पलड़ा मजबूत माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने चुनाव आयुक्त के दौरान छह साल पहले तीनों नगर निगमों के वार्डों का परिसीमन भी किया था।
दूसरी ओर नगर निगम के प्रशासक के लिए लक्षद्वीप के प्रशासक और गुजरात सरकार में मंत्री रह चुके प्रफुल पटेल का नाम भी सुर्खियों में है। हालांकि वह नौकरशाह से नेता बन चुके हैं और राज्यसभा में मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऐलान किया था कि नगर निगम का प्रशासक नेता नहीं, बल्कि किसी अन्य को बनाया जाएगा। वैसे भी प्रफुल पटेल का नाम दिल्ली के उपराज्यपाल के लिए चल रहा है। इसके अलावा नगर निगम के प्रशासक के लिए कई अन्य नौकरशाहों के नामों की भी चर्चा है।
आयुक्त के लिए अंशु प्रकाश, नरेश कुमार व मनीष गुप्ता की चर्चा
दिल्ली नगर निगम के आयुक्त पद के लिए तीन अधिकारियों के नाम प्रमुख तौर पर सुर्खियों में है। ये तीनों अधिकारी एकीकृत नगर निगम में वर्षों तक अतिरिक्त आयुक्त के तौर पर सेवा दे चुके हैं। खास बात यह है कि इन तीनों अधिकारियों की केंद्र सरकार की नजर में अच्छी छवि बताई जा रही है। ये तीन अधिकारी दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव अंशु प्रकाश, अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव नरेश कुमार और डीडीए के उपाध्यक्ष का अस्थायी तौर पर कार्य देख रहे मनीष गुप्ता बताए जा रहे है। अंशु प्रकाश ने नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त रहने के दौरान कई विभागों के प्रभारी के तौर पर कार्य किया था, वहीं नरेश कुमार ने अतिरिक्त आयुक्त का कार्यकाल तब संभाला था, जब नगर निगम को मास्टर प्लान-2021 के प्रावधानों को लागू करना था और दिल्ली निवासियों को सीलिंग की कार्रवाई से निजात दिलानी थी। यह कार्य नरेश कुमार ने बखूबी किया था। इसके अलावा वह कई वर्षों तक एनडीएमसी के चेयरमैन भी रहे हैं। जबकि मनीष गुप्ता नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त रहने के अलावा नगर निगम के बंटवारे के बाद दक्षिण दिल्ली नगर निगम के आयुक्त भी बने थे। सूत्रों के अनुसार नगर निगम के आयुक्त पद पर अंशु प्रकाश का पलड़ा अधिक मजबूत है, क्योंकि मुख्य सचिव रहने के दौरान मुख्यमंत्री निवास में उनके साथ मारपीट होने का मामला प्रकाश में आने के बाद उनका दिल्ली की आप सरकार के साथ 36 का आंकड़ा हो गया था। केंद्र सरकार भी राजनीतिक तौर पर ऐसे ही अधिकारी को आयुक्त बनाना चाहेगी जिसके दिल्ली सरकार के साथ संबंध अच्छे नहीं हो और दिल्ली सरकार से नगर निगम को उसका हक दिलाने के लिए अड़ जाए।