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Delhi News: अब दिल्ली पीडब्ल्यूडी का अपना इंजीनियरिंग कैडर बनाने की तैयारी

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मसौदा नोट तैयार, आगामी मंगलवार को कैबिनेट में किया जा सकता है पेश
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। राजधानी की सड़कों और बुनियादी ढांचे को नया आयाम देने की दिशा में दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने अपना अलग इंजीनियरिंग कैडर बनाने के लिए कैबिनेट के समक्ष मसौदा नोट पेश किया है। सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव आगामी मंगलवार को कैबिनेट बैठक में पेश किया जा सकता है।

अभी तक दिल्ली पीडब्ल्यूडी में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) से आए इंजीनियर काम कर रहे हैं। उनकी नियुक्ति, तबादला और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जिम्मेदारी भी सीपीडब्ल्यूडी के पास ही है। यही कारण है कि अक्सर दिल्ली सरकार को किसी इंजीनियर पर सीधे कार्रवाई करने में दिक्कत आती है और मंजूरी एलजी और सीपीडब्ल्यूडी से लेनी पड़ती है। इसके अलावा सीपीडब्ल्यूडी इंजीनियरों का हर तीन साल में दिल्ली से बाहर तबादला भी हो जाता है जिससे कई परियोजनाएं अधूरी रह जाती हैं और लागत बढ़ जाती है। पीडब्ल्यूडी द्वारा तैयार मसौदा नोट में कहा गया है कि विभाग का अपना कैडर बनाया जाएगा और इसके संचालन की रूपरेखा तय करने के लिए विशेषज्ञों व सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित होगी। कैडर बनने के बाद जूनियर इंजीनियर से लेकर मुख्य अभियंता तक सभी पदों पर भर्ती और पदोन्नति दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में होगी।
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पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बीते माह कहा था कि यह सिर्फ दिल्ली पीडब्ल्यूडी ही नहीं बल्कि पूरे शहर के लिए ऐतिहासिक मोड़ होगा। जब इंजीनियर सिर्फ दिल्ली की जनता के प्रति जवाबदेह होंगे तो उनकी कार्यक्षमता और प्रतिबद्धता अपने आप बढ़ेगी। अधिकारियों ने बताया कि कैडर लागू होने के बाद मौजूदा सीपीडब्ल्यूडी से आए अधिकारी या तो अपने मूल विभाग लौट सकते हैं या शर्तों के अनुसार स्थायी रूप से दिल्ली पीडब्ल्यूडी में शामिल हो सकते हैं।
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अन्य विभागों के पास है अपनी इंजीनियरिंग विंग

राजधानी में दिल्ली विकास प्राधिकरण, एनडीएमसी और नगर निगम दिल्ली जैसे अन्य निकायों के पास पहले से ही अपनी इंजीनियरिंग विंग है। अब दिल्ली पीडब्ल्यूडी भी स्वतंत्र तकनीकी कैडर के साथ काम करेगा। माना जा रहा है कि इस कदम से परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और लंबे समय से चली आ रहीं व्यवस्थागत बाधाएं दूर होंगी।
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