कैंपस में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने कुलपति कार्यालय की दूसरी मंजिल में छात्रसंघ और आम छात्रों के साथ बैठक की। समिति ने सभी छात्रों से उनकी दिक्कतों की जानकारी ली।
अंदर बैठक चल रही थी तो बाहर आम छात्रों ने बैनर, तख्ती आदि के साथ हॉस्टल मैनुअल रोलबैक की मांग की। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी मर्जी से कोई फैसला उन पर नहीं थोप सकता है।
इससे पहले सुबह साबरमती ढाबे के बाहर जेएनयू एबीवीपी इकाई ने हॉस्टल मैनुअल को पूरी तरह वापस लेने की मांग के साथ विरोध दर्ज करवाया। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
उधर, बैठक में कमेटी के पक्ष की जानकारी देते हुए छात्रसंघ महासचिव सतीश यादव ने कहा कि कमेटी ने विद्यार्थियों की मांगों पर सहमति जताई, लेकिन उन्होंने बैठक में किसी भी तरह की कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि उनकी बात को माना जाएगा या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन वह अपनी संस्तुति देंगे।
सूत्रों के मुताबिक, कमेटी मंत्रालय को सोमवार को रिपोर्ट देगी। इसमें दिक्कतों के साथ समाधान के सुझाव भी होंगे। समिति सदस्य छात्रों से खासे प्रभावित हैैं। विद्यार्थियों ने अपनी हर दिक्कत को समिति के समक्ष रखा है।
वे खुद मानते हैं कि विश्वविद्यालय में कई साल से फीस बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह होनी चाहिए, पर छात्रसंघ समेत आम छात्रों की सहमति से। सूत्रों के मुताबिक, समिति फिलहाल इस हॉस्टल मैनुअल ड्राफ्ट पर पुनर्विचार की सिफारिश कर सकती है। नए ड्राफ्ट में फीस बढ़ोतरी होगी, पर पहले से बेहद कम।
बैठक में सामने आया निष्कर्ष
- कुलपति बात करते तो छात्रसंघ से लेकर आम छात्र तक हॉस्टल मैनुअल को लेकर सड़कों पर आंदोलन नहीं करते।
- विश्वविद्यालय प्रबंधन को एक साथ इतनी अधिक फीस नहीं बढ़ानी चाहिए थी। थोड़े-थोड़े अंतराल पर फीस बढ़ोतरी होने पर छात्र विरोध नहीं करते।
- विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद न होना आंदोलन का बड़ा कारण बना।
- छात्रसंघ को भी विभिन्न कमेटियों में एक सदस्य के रूप में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि आम छात्रों की राय को शामिल किया जा सके।
- स्कूल व सेंटर के प्रमुख, हॉस्टल वार्डन आदि ने ढंग से छात्रों को हॉस्टल मैनुअल ड्राफ्ट पर जानकारी नहीं दी।
- विश्वविद्यालय के फैसलों में छात्रों की भागीदारी न होने से अधिक दिक्कत आई।
- कुलपति प्रो. एम. जगदीश कुमार से छात्रों से संवाद करने की सिफारिश की जाएगी।