नई दिल्ली, । गुरुग्राम के सिविल अस्पताल में तैनात डाक्टर योगेन्द्र सिंह की समझदारी व गूगल ट्रांसलेटर से युवक की पहचान होने का रोचक मामला सामने आया है। युवक यमन देश का निकला। डॉक्टर ने दिल्ली में तैनात अपनी डॉक्टर पत्नी व ग्रेटर कैलाश थाना पुलिस की मदद ली और युवक को बुधवार को यमन एंबेसी पहुंचा दिया। शुरू में लोग युवक को जमाती समझ कर कोरोना होने की बात कहकर दूर भाग रहे थे। दक्षिण जिला डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर ने बताया कि हरियाणा सरकार की एंबुलेंस ने कादरपुर, गुरूग्राम में मिले युवक को सिविल लाइन अस्पताल, गुरुग्राम में १८ अप्रैल को भर्ती कराया था। युवक सड़क पर बेहोशी जैसी अवस्था में पड़ा हुआ था। अस्पताल में जांच करने पर पता लगा कि युवक की पहले सिर की सर्जरी हो चुकी है। मगर अस्पताल में कोई भी युवक की भाषा को समझा नहीं पा रहा था। युवक सबको देखकर डरकर उधर-उधर भाग रहा था। वह चाय व बिस्कुट ले लेता, मगर रोटी नहीं खाता था। अस्पताल के कैजुल्टी इंचार्ज डॉ.योगेन्द्र सिंह ने विभिन्न भाषा के जानकारों को बुलाया, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। युवक डा. योगेन्द्र सिंह से घुल-मिल गया। डा. योगेन्द्र सिंह ने अपने मोबाइल में गूगल ट्रांसलेटर खोलकर दिया और युवक से टाइप करवाया। गूगल ट्रांसलेटर से युवक की पहचान यमन निवासी युसूफ(२२) के रूप में हुई। गूगल पर यमन एंबेसी का नंबर व पता सही नहीं आ रहा था। उन्होंने दिल्ली में तैनात अपनी पत्नी डॉक्टर सरोज यादव को सारी बात बताई। डा. सरोज ने ग्रेटर कैलाश-एक थानाध्यक्ष सोमनाथ पारूथी से सहायता मांगी। थानाध्यक्ष सोमनाथ पारूथी ने एंबेसी से बात करने लिए सिपाही हवा सिंह को वसंत विहार भेजा। वहां जाकर पता लगा कि एंबेसी का कार्यालय शांति निकेशन चला गया। हवा सिंह ने यहां पहुंचकर सोमनाथ पारूथी के जरिए एंबेसी अधिकारियों बात की और फिर युवक को एंबेसी अधिकारियों के हवाले कर दिया। युवक अपने भाई का इलाज करने यमन से दिल्ली फरवरी में आया था। वह दिल्ली में अपने परिवार से बिछुड़ गया था।