दिल्ली में महिलाओं से ज्यादा बच्चियां असुरक्षित हैं। देश की राजधानी में सरकारी हेल्पलाइन पर रोजाना दो हजार से अधिक महिलाएं सुरक्षा की गुहार लगा रही हैं। इसमें 42 फीसदी मामले यौन शोषण से संबंधित हैं। हेल्पलाइन में आए फोन के ब्योरे बता रहे हैं कि यौन शोषण की शिकार बच्चियां ज्यादा हो रही हैं।
11 महीने तीन दिन में महिलाओं के साथ बलात्कार की 144 घटनाएं हेल्पलाइन पर आई हैं। इसी दौरान ढाई गुना अधिक 353 बच्चियां यौन शोषण की शिकार हुई हैं। वहीं किशोरी और बच्चियों के गायब होने तथा अपहरण के मामले भी बढ़ रहे हैं। 31 दिसंबर 2012 से 2 दिसंबर 2013 के बीच 750 से अधिक फोन बच्चियों के गायब होने अथवा अपहरण से जुड़े हुए आए हैं। ये मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि 20 फीसदी फोन कॉल चौबीस घंटे हेल्पलाइन नंबर 181 पर तैनात कॉलर अभी भी अटेंड नहीं कर पाते हैं।
दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन का काम देख रही मानवाधिकार सलाहकार खादीजा फारूकी बताती हैं कि ट्रेंड भी बदला है। ऐसा नहीं है कि किसी एक वर्ग की लड़कियां गायब हो रही हैं और अपहरण हो रहा है। बल्कि हर वर्ग इसमें शामिल है। हालांकि पचास फीसदी मामलों में बरामदगी हो रही है। यह चिंता का विषय है। वह कहती हैं 6.62 लाख कॉल में से 88 हजार में डीडी एंट्री या एफआईआर कराई गई है।
सरकारी विभागों से भी छेड़छाड़ और घूरने जैसी शिकायतें आ रही हैं। किशोरी और बच्चियों के साथ यौन शोषण के 353 मामलों में से 24 पर फैसले आ चुके हैं जबकि जनवरी-मार्च 2014 तक ज्यादातर केस फाइनल हो जाएंगे। मामले अधिक आने को लेकर फारूकी कहती हैं कि समाज में बदलाव आए हैं। मामले बढ़ने के पीछे शर्म से निकलकर मामले दर्ज कराने की तरफ बढ़ना भी शामिल है। लोग कॉल करते हैं।