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जुर्म कबूलने के लिए पुलिस ने दो भाइयों को पीटा

Mon, 24 Mar 2014 01:36 AM IST
धीरज बेनीवाल/ नई दिल्ली
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अपराधियों से जुर्म कबूल करवाने के लिए पुलिस हर कोशिश करती है और उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट भेजती है।
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शायद ही किसी ने सुना हो कि पुलिस हत्या के मामले में परिजनों पर पांच दिन तक कहर बरसाने के बाद गिरफ्तार करने के बजाय उन्हें छोड़ दे।

ऐसे ही एक मामले में हाईकोर्ट ने दो युवकों की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मामला बाहरी दिल्ली के अमर विहार थाने से जुड़ा है। परवेश नगर निवासी विजेंद्र की 26 अगस्त 2013 को हत्या हो गई थी। वह अपने भाई और भांजों के साथ रहता था। पत्नी के साथ विजेंद्र का मनमुटाव था और दोनों अलग रहते थे।

पुलिस ने हत्या के आरोप में विजेंद्र के भांजों अनिल और सुनील को पांच दिनों तक थाने में रखकर बुरी तरह पीटा और उसके बाद उन्हें छोड़ दिया।

पीड़ितों ने याचिका दायर कर अमन विहार एसएचओ महेंद्र, अतिरिक्त एसएचओ राकेश, पुलिसकर्मी दीपक, एसआई भूपेश और सुखेंदर पर मारपीट व अवैध हिरासत में छह दिनों तक रखने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
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न्यायमूर्ति वीना बीरबल ने याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली पुलिस के बाहरी जिला उपायुक्त को नोटिस जारी कर 28 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने डीसीपी से पूछा है कि यह क्यों और किन हालात में हुआ।
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पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस की पिटाई से अनिल के पैर की नसें टूट गई हैं। पुलिस ने इसे इतना मारा कि तीन महीने बाद भी जमीन पर बैठने में असमर्थ है। पुलिस आज भी इस मामले में किसी अपराधी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
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