नई दिल्ली में कांग्रेस के एक दर्जन विधायकों के टिकट पर लटकी तलवार अभी तक नहीं हटी है। मुखालफत राहुल गांधी तक पहुंची जिसे प्रदेश स्तर के नेताओं को सुलझाने के आदेश दिए गए।
बृहस्पतिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जेपी अग्रवाल के निवास पर मुख्यमंत्री भी अपने मंत्रियों के टिकट बचाने के लिए ब्लॉक अध्यक्ष, हारे-जीते पार्षद के साथ बैठीं।
दिनभर अलग-अलग विधायकों के लिए चली बैठक में सहमति नहीं बन सकी। ब्लॉक अध्यक्षों के अलावा कई जगह निगम का चुनाव हारने वालों ने विधायकों पर आरोप लगाया कि जानबूझकर विधायक नहीं हरवा दिया।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार मंत्री रमाकांत गोस्वामी व प्रो. किरण वालिया की शिकायत वहां के ब्लॉक अध्यक्षों ने खूब की है। इनके साथ ही 11 अन्य विधायकों की शिकायत भी पहुंची जिसमें ऑब्जर्बर की निगेटिव रिपोर्ट शामिल है।
कई स्तर पर मिली शिकायत और राहुल गांधी से कुछ शिकायतकर्ताओं की मुलाकात के बाद प्रदेश नेताओं को निर्देश मिला है कि पहले मामला सुलझाएं, तभी टिकट बटेंगे।
उसी को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष जेपी अग्रवाल के घर पर बैठकें बुलाई गईं। बुधवार को भी कुछ विधायकों को बुलाया गया था।
प्रदेश अध्यक्ष जेपी अग्रवाल के साथ मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व प्रदेश कांग्रेस के कुछ पदाधिकारियों ने मिलकर विरोध करने वाले ब्लॉक अध्यक्ष, निगम पार्षद व निगम चुनाव में हारे प्रत्याशियों बैठाकर शांत करने की कोशिश की।
लेकिन रमाकांत गोस्वामी के क्षेत्र से आए नेताओं ने साफ किया है कि इन्हें टिकट दिया गया तो पार्टी की हार पक्की है।
वहीं, पटेल नगर से आए नेताओं ने कहा है कि राजेश लिलोठिया को टिकट दिए जाने पर उसका विरोध करेंगे।
सूत्रों का कहना है कि मंत्री रमाकांत गोस्वामी व प्रो. किरण वालिया के अलावा विधायक दयानंद चंदेला, आसिफ मोहम्मद खान, जसवंत राणा, देवेंद्र यादव, नीरज बसोया, मालाराम गंगवाल, राजेश लिलोठिया, हरिशंकर गुप्ता व सुरेंद्र पाल सिंह बिट्टू की सीटो पर भी मतभेद सामने आए हैं।
हालांकि टिकट काटे जाने की बात सिर्फ तीन विधायकों के लिए की जा रही है।