नई दिल्ली में कांग्रेस में उम्मीदवारों के पैनल को लेकर जंग छिड़ गई है।
आधा दर्जन से अधिक विधानसभा क्षेत्रों के पदाधिकारी इसका विरोध करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेताओं के पास पहुंचे।
पदाधिकारियों ने पार्टी नेताओं से कहा है कि उनके क्षेत्र के पैनल के अनुसार तो वर्षों से पार्टी का कार्य करने वालों को कभी टिकट नहीं मिलेगा, क्योंकि कभी नेताओं के परिजन आगे आ जाएंगे तो कभी नेता अपने चहेतों को बाहर से ले आएंगे।
सभी नेताओं ने उनको आश्वासन दिया कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया जाएगा।
सबसे अधिक विरोध नजफगढ़ और बादली विस क्षेत्र के पैनल को लेकर है।
दोनों इलाकों के पदाधिकारियों ने प्रदेश प्रभारी शकील अहमद, स्क्रीनिंग कमेटी के प्रमुख नारायण सामी, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल से मुलाकात की।
नजफगढ़ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पैनल में उस व्यक्ति को नाम शामिल किया गया है, जिसने वर्ष 2007 में नगर निगम और वर्ष 2008 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के खिलाफ लड़ा था।
साथ ही पिछले नगर निगम चुनाव में उसने भाई की पत्नी को कांग्रेस के खिलाफ उतारा था। इस मामले को लेकर पदाधिकारियों की सांसद महाबल मिश्रा से खूब नोकझोंक हुई।
वहीं, बादली के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक का टिकट काटकर एक ऐसे नेता को टिकट देने की पैरवी की जा रही है, जिसने पिछला चुनाव बसपा से लड़ा था।
मुंडका, किराड़ी, ग्रेटर कैलाश आदि क्षेत्रों के पदाधिकारी बाहरी व्यक्ति को टिकट देने का विरोध कर रहे हैं। द्वारका क्षेत्र के पदाधिकारी सांसद महाबल मिश्रा के बेटे को टिकट देने का कड़ा विरोध कर रहे हैं।