दिल्ली विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है लेकिन भाजपा कार्यकर्ता अपने नेता को लेकर अभी भी असमंजस में हैं। किसके नेतृत्व में चुनावी नैया पार लगेगी, इसे लेकर उनकी बेचैनी बढ़ी हुई है।
डॉ. हर्षवर्धन को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की चर्चा के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं का जोश ठंडा पड़ता दिखाई पड़ रहा है।
कार्यकर्ता ही नहीं प्रदेश के कई नेता भी दो गुटों में एक बार फिर बंटते दिखाई पड़ रहे हैं।
प्रदेश टीम जहां गोयल के पक्ष में खड़ी है, वहीं कई नेता अब डॉ. हर्षवर्धन से करीबी बढ़ाने लगे हैं।
प्रदेश भाजपा कार्यालय में भी गोयल के करीबी तो दिखे, लेकिन कई नेता डॉ. हर्षवर्धन के उम्मीदवार बनाए जाने की अफवाह के बाद नदारद रहे।
अब उन्हें यह भय सताने लगा है कि अगर डॉ. हर्षवर्धन को कमान सौंप दी जाती है और वे गोयल से नजदीकी बढ़ाते हैं तो उनका भी पत्ता साफ हो सकता है।
उधर, कार्यकर्ता भी परेशान हैं कि वे किसे अपना नेता मानें और किसके आदेश पर चुनावी अभियान में जुटें।
17 अक्तूबर से 21 अक्तूबर तक भाजपा घर-घर चलो अभियान शुरू करने वाली है।
जानकारों का मानना है कि अगर यही स्थिति रही तो भाजपा का यह अभियान भी परवान नहीं चढ़ पाएगा।
वहीं, अचानक आए इस बवंडर के बाद भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व भी चिंतित है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के सभी कार्यकर्ताओं को भाजपा राष्ट्रीय कार्यालय ने बृहस्पतिवार को बुलाया है। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल उनके साथ बैठक करेंगे।