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क्राइम ब्रांच की टीम पर बरसाईं गोलियां

Fri, 08 Nov 2013 01:30 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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नई दिल्ली के नेहरू प्लेस इलाके में बुधवार को जैतपुर के एक व्यवसायी से जबरन वसूली के मामले की जांच करने पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम पर दक्षिण-पूर्व जिला के एक एसआई और हवलदार ने गोलियां बरसा दीं।
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गनीमत रही कि गोली किसी पुलिसकर्मी को नहीं लगी। हवलदार और एक सिपाही तो क्राइम ब्रांच की टीम को चकमा देखकर फरार हो गए, लेकिन एसआई को क्राइम ब्रांच ने दबोच लिया।

उसके पास से सर्विस पिस्टल बरामद हो गई है। क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रयास, सरकारी काम में बाधा और जबरन वसूली का मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।
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अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि जैतपुर निवासी संजय कुमार ठाकुर ने क्राइम ब्रांच में आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जबरन वसूली की शिकायत की थी।

संजय ने बताया कि वह कोचिंग सेंटर के साथ ही ई-टिकटिंग का काम करता है। सोमवार को उसके दफ्तर में एसआई नागेंद्र, हवलदार अमित तोमर और सिपाही कौशल आए।

तीनों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताया और ई-टिकटिंग को अवैध तरीके से प्रिंट करने का आरोप लगाया। दफ्तर से तीनों पुलिसकर्मी उसके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क निकालकर उसे भी नेहरू प्लेस ले आए।

यहां आकर तीनों ने उसे फंसाने की धमकी देकर पांच लाख रुपये की मांग की। संजय ने परिजनों को फोन कर डेढ़ लाख रुपये भी दिए, लेकिन तीनों ने बाद में बाकी रुपये देने की बात कर हार्ड डिस्क उसे नहीं दी। परेशान संजय ने मामले की शिकायत क्राइम ब्रांच से की।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के मुताबिक, बुधवार शाम को क्राइम ब्रांच इंटर स्टेट की टीम एसीपी सतीश यादव और इंस्पेक्टर मनोज कुमार के नेतृत्व में नेहरू प्लेस पहुंची। वहां पहुंचते ही छानबीन शुरू की गई।

हवलदार अमित तोमर अपनी कार में बैठा था। भनक लगते ही वह क्राइम ब्रांच की टीम पर गोलियां बरसाकर कार समेत फरार हो गया।

टीम ने एसआई नागेंद्र को काबू करने का प्रयास किया तो नागेंद्र इंस्पेक्टर मनोज को धक्का देकर भाग खड़ा हुआ। पकड़े जाने के डर से आरोपी ने अपनी सर्विस पिस्टल से टीम पर गोलियां बरसा दीं।

किसी तरह एसआई को काबू किया गया। पुलिस ने उसके पास से सर्विस पिस्टल बरामद की। फिलहाल अभी संजय की ओर से दिए गए रुपये बरामद नहीं हो पाए हैं।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक पूरे घटना क्रम की सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हाथ लगी है। पुलिस अमित और कौशल की तलाश कर रही है।

क्राइम ब्रांच की टीम पर गोली चलाने का मामला:
नई दिल्ली में अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल पर लगे एक सीसीटीवी कैमरे में सारी वारदात कैद है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, एसआई नागेंद्र ने चकमा देकर भागने का प्रयास किया, लेकिन एसीपी सतीश यादव ने करीब एक किलोमीटर दौड़कर उसे दबोच लिया।

अधिकारियों की मानें तो आरोपी ने जान देने की धमकी देकर अपनी कनपटी पर पिस्टल भी तान दी थी। एक अधिकारी ने बताया कि मूलरूप से गांव देताकलां, अलीगढ़ का रहने वाला नागेंद्र 2003 में दिल्ली पुलिस में सिपाही भर्ती हुआ था।

2006 में वह स्पेशल सेल में चला गया और 2010 में परीक्षा देकर सब इंस्पेक्टर बन गया। उसके बाद फरवरी 2013 में दक्षिण-पूर्व जिला में सीडीआर इंचार्ज बन गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक अमित ने दो राउंड, जबकि नागेंद्र ने तीन राउंड गोलियां चलाई। अपराध शाखा पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त की टीम के सदस्य हैं तीनों आरोपी
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि छानबीन के दौरान पता चला है कि अमित, नागेंद्र और कौशल दक्षिण-पूर्व जिला के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जॉय टिर्की की स्पेशल टीम के सदस्य हैं।

इस बात का पता लगाया जा रहा है कि आखिर किसके आदेश पर उगाही की जा रही है। नागेंद्र से पूछताछ कर इस बात का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस धंधे में और कौन-कौन शामिल है।

अमित और नागेंद्र सस्पेंड, बर्खास्त करने की तैयारी
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जबरन वसूली और पुलिसकर्मियों पर गोली चलाने के मामले में अमित और नागेंद्र को सस्पेंड कर दिया गया है।

दोनों को बर्खास्त करने की तैयारी चल रही है। रविंद्र यादव ने बताया कि पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से उगाही करने वाले अन्य लोगों को संदेश जाएगा और वह ऐसा करने से पहले दस बार सोचेंगे।

खुद को क्राइम ब्रांच का एसआई बताता था अमित
अपराध शाखा की टीम पर गोली चलाने वाला अमित तोमर खुद को अपराध शाखा का सब इंस्पेक्टर बताता था। उसके जुगाड़ और पहुंच की वजह से पुलिस महकमे के कम ही लोग जानते थे कि वह एसआई नहीं, बल्कि हवलदार है। पुलिस अधिकारी उसे चुर्ली के नाम से जानते थे।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जॉय टिर्की का अपराध शाखा से दक्षिण-पूर्व जिले में ट्रांसफर होने के बाद वह अमित को अपने साथ ले गए थे। सूत्रों की मानें तो जॉय जहां भी गए, अमित को अपने साथ रखा।

अधिकारियों की मानें तो अभी कागजों में अमित की तैनाती अपराध शाखा में ही थी। फिलहाल अपराध शाखा की कई टीमें अमित की तलाश कर रही हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाद अन्य तथ्यों से पर्दा उठ पाएगा।
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