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नई तकनीक से मोतियाबिंद का ऑपरेशन

Mon, 10 Mar 2014 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
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सरकारी अस्पतालों में दिल्ली का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऐसा पहला चिकित्सा संस्थान बन गया है जहां फेम्टोसेकेण्ड लेजर तकनीक से मोतियाबिंद की सर्जरी शुरू की गई है।
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एम्स में अभी तक यह सर्जरी सामान्य तकनीक व उपकरणों से की जाती थी।

बीते कुछ दिनों से जारी ट्रायल के बाद सोमवार को एम्स के राजेंद्र प्रसाद सेंटर (नेत्र अस्पताल) के 47वें स्थापना दिवस पर इस तकनीक से इलाज की औपचारिक शुरुआत की घोषणा कर दी जाएगी।

चिकित्सकों के मुताबिक फेम्टोसेकेण्ड लेजर तकनीक से मोतियाबिंद की सर्जरी करने के लिए चाकू व अन्य दूसरे औजारों की जरूरत नहीं पड़ती।

इस तकनीक में लेजर से ही कैट्रेक्ट के ऊपरी भाग को खोला जाता है।

पहले कॉर्निया के उभरे भाग को अल्ट्रासोनिक मशीन से मेल्ट करते थे। लेकिन अब यह सभी प्रक्रिया फेम्टोसेकेण्ड लेजर से आसानी से हो जाती है।

इसमें न सिर्फ समय की बचत होती है बल्कि मरीजों को अस्पताल से छुट्टी भी जल्दी मिल जाती है।

एम्स आरपी सेंटर के प्रमुख डॉ. आरवी आजाद ने बताया कि इस तकनीक से कुछ निजी अस्पतालों में सर्जरी शुरू की गई है, लेकिन एम्स पहला सरकारी अस्पताल है, जहां तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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डॉ. आजाद ने बताया कि निजी अस्पतालों में इस सर्जरी के लिए एक लाख रुपये से ज्यादा की राशि खर्च करनी पड़ती है जबकि एम्स में 25 हजार रुपये में यह सर्जरी की जाएगी।
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प्रति माह 50 से 60 ऐसे मरीजों की सर्जरी एम्स में की जाती है।

आरपी सेंटर के ओपीडी का विस्तार
एम्स के राजेंद्र प्रसाद सेंटर (नेत्र अस्पताल) में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ओपीडी क्षेत्र का विस्तार किया गया है।

ओपीडी में छह नए काउंटर बनाए गए हैं। इन काउंटर डॉक्टर सिर्फ मरीज को देखेंगे ही नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर आंखों की जरूरी जांच पड़ताल भी की जाएगी।



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