दिल्ली पुलिस अब झपटमारी व चोरी के मामलों में अपराधियों पर फोर्स (दबाव) मैथड को अपनाएगी।
इसके मुताबिक अगर इन वारदातों के दौरान पीड़ित के साथ थोड़ी सी भी जोर-जबरदस्ती होगी तो झपटमारी की बजाय लूट का मामला दर्ज किया जाएगा, ताकि अपराधी को ज्यादा से ज्यादा सजा मिल सके।
ऐसे मामलों में पुलिस लूट के सबूत तलाश करेगी।
दिल्ली पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने शुक्रवार को जिला प्रमुख व अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों को आदेश दिया कि झपटमारी व चोरी के मामलों को लूट की धाराओं में दर्ज किया जाए।
बस्सी ने कहा कि पुलिस दो तरीकों से केस को सुलझाती है। एक तो पुलिस क्राइम से अपराधी तक पहुंचती है और दूसरा पुलिस सीधे अपराधी तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि अचानक पीछे से आए बदमाश महिला के गले से चेन छीनकर फरार हो जाते हैं।
ऐसे में पीड़िता न तो अपराधी का चेहरा देख पाती है और न ही अपराधी के बारे में कोई सुराग होता है।
ऐसे में पुलिस झपटमारी के मामलों को आईपीसी की हल्की धाराओं 356 और 379 के तहत दर्ज करती है। पुलिस आयुक्त का कहना है कि इन धाराओं में मामला दर्ज करना पुलिस की मजबूरी भी होती है।
आईपीसी की धारा 356 के तहत दो वर्ष, जबकि धारा 379 के तहत तीन वर्ष की सजा का प्रावधान है।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस आयुक्तने जारी आदेश में कहा है कि अगर झपटमारी व चोरी की वारदातों के दौरान बदमाश बल का प्रयोग करता है तो पुलिस आईपीसी की धारा 392 के तहत लूट का मामला दर्ज करेगी। इस धारा के तहत 10 से 14 वर्ष की सजा का प्रावधान है।