चुनाव के अंतिम दौर में घर बैठकर सोशल मीडिया के माध्यम सीधे वोटर से जुड़ने की योजना बना रहे नेताओं पर चुनाव आयोग ने पानी फेर दिया है।
आयोग ने निर्देश जारी किया है कि प्रचार बंद होने के साथ नेता सोशल मीडिया पर भी प्रचार नहीं कर पाएंगे।
इस तरह नेताजी सोशल मीडिया यानी फेसबुक, ट्विटर पर आयोग के चाबुक के आगे नजरबंद हो गए हैं।
वह मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से भी प्रचार नहीं कर सकते हैं।
दरअसल, मतदान के 48 घंटे पहले दिल्ली में चुनाव प्रचार पर पाबंदी लगा दी गई है। इस बार फिजिकल माध्यम से चुनाव प्रचार पर पाबंदी के साथ आयोग ने पहली बार वर्चुअल माध्यमों (फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब) से भी प्रचार नहीं करने का आदेश दिए हैं।
यानी कोई भी प्रत्याशी सोमवार को पांच बजे के बाद सोशल मीडिया साइट्स पर न तो अपना, पार्टी का प्रचार कर सकता है और न ही लोगों से वोट की अपील।
चुनाव अधिकारियों ने राजनैतिक दलों से यह भी कहा है कि बीते दिनों में जो भी चुनाव से संबंधित पोस्ट फेसबुक, ट्विटर पर डाले गए हैं वह कंटेंट भी प्रत्याशी हटा लें।
उसमें चुनाव आयोग से अनुमति लेकर चलाए गए प्रचार सामग्री भी शामिल है।
इसके अलावा व्हाट्स ऐप जैसे मोबाइल एप्लीकेशन से भी ग्रुप में लोगों से जुड़कर प्रचार करने पर भी आयोग पाबंदी लगाई है।
एमसीएमसी कमेटी के प्रमुख व चुनाव अधिकारी नीरज भारती ने बताया कि सोशल मीडिया से सभी पुराने प्रचार सामग्री हटाने का निर्देश जारी कर दिया गया है।
इसके अलावा कोई भी वोट अपील या नई प्रचार सामग्री सोमवार पांच बजे के बाद नहीं डाल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सभी प्रत्याशियों के अकाउंट आयोग के पास है। इस पर आयोग की नजर है। फिर भी कोई करता हुआ पाया गया तो उसके ऊपर आचार संहिता उल्लंघन के तहत कार्रवाई होगी।