नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राजधानी के वन क्षेत्रों में बेतरतीब निर्माण को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि दिल्ली सरकार अभी तक यह नहीं बता पाई है कि किस हरित इलाके को वन क्षेत्र माना जाए, क्योंकि हर तरफ ही निर्माण हो रहा है। ट्रिब्यूनल ने तीन महीने के भीतर सरकार से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंतर कुमार ने कहा कि दिल्ली सरकार के 1994 के नोटिफिकेशन में तमाम खामियां हैं, जिसमें कहा गया है कि राजधानी का 6000 हेक्टेयर एरिया वन परिक्षेत्र के लिए रिजर्व है। उन्होंने कहा कि 1994 से अब तक लंबा वक्त गुजर गया, मगर सरकार ने इस अराजक स्थिति की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। जिधर देखिए पेड़ काटे जा रहे हैं और निर्माण कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह साफ-साफ बताए कि कौन सा एरिया वन क्षेत्र में हैं और कौन सा नहीं। यह आम लोगों के वन अधिकार का अतिक्रमण है और एक तरह का भ्रष्टाचार है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि लोगों को भी वन अधिकारों को लेकर सजग रहना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार के पर्यावरण सचिव और शहरी विकास मंत्रालय से कहा है कि दोनों इकाइयां आपस में तालमेल करके 1994 के नोटिफिकेशन पर स्थिति साफ करें और 29 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करें।