नई दिल्ली। अनधिकृत कॉलोनी वोट बैंक की खातिर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित शहरी विकास मंत्री अरविंदर सिंह के साथ बृहस्पतिवार को केंद्रीय मंत्री कमलनाथ से मिलीं। जिन 450 कॉलोनियों में विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं वहां विकास कार्य करने, नियमन के लिए मास्टर प्लान के प्रावधान में बदलाव करने, 2002 में 10 फीसदी व 2007 में 50 फीसदी की बसावट की शर्त हटाकर सिर्फ कॉलोनी का होना मानक बनाने की शर्त रखने की छूट मांगी है। पुनर्वास कालोनियों को मालिकाना हक देने के लटके मामले में रखे गए शुल्क को आधा करने की मांग भी रखी गई।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया है कि कॉलोनियों के नियमन से संबंधित मांगें जल्द पूरी की जाएंगी। 8 फरवरी, 2007 को 50 फीसदी से अधिक प्लॉट निर्मित होने की शर्त को हटाने की मांग रखकर तर्क दिया है कि आवेदन 2008 में मंगाए थे तो इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। सरकारी जमीन वाली कॉलोनियों में एक निर्धारित जुर्माना व कीमत करने की मांग भी रखी गई है। जिन कॉलोनियों में डीडीए की खाली जमीन पड़ी है उसे सेवा उपलब्ध कराने के लिए अधिग्रहित करने की छूट भी मांगी है।
मुख्यमंत्री ने मीटिंग में कहा है कि जिन 583 कॉलोनियों में सरकारी व प्राइवेट जमीन में मिक्स हैं। वहां प्राइवेट खसरे वाली जमीन की खरीद फरोख्त की अनुमति दें। इतना ही नहीं बची हुई कालोनियों को नियमित करने के लिए जरूरी कागजी खानापूर्ति में छूट देने की शक्ति केन्द्र सरकार से मांगी है। वहीं दूसरी तरफ केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि कालोनियों के विकास कार्य तेज करने के अलावा राजीव गांधी आवास योजना में निर्माण तेज करने और नए किराया कानून के संबंध में भी मुख्यमंत्री ने अपनी राय रखी है।