नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने रोहिणी आवासीय योजना के तहत पूठ खुर्द गांव के किसानों की जमीन अधिग्रहीत करने मामले में डीडीए, उपराज्यपाल, दिल्ली सरकार व केंद्र सरकार से जवाब-तलब किया है। न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल ने सभी पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि भूमि अधिग्रहण में संसदीय कमेटी की अनुशंसाओं को अब तक लागू क्यों नहीं किया गया। कमेटी ने अपनी सिफारिश में कहा कि किसानों की भूमि का जिस दर पर अधिग्रहण किया जाए, उसी दर पर किसानों को प्लाट दिए जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 जुलाई को तय की है।
अदालत ने गांव के दो दर्जन किसानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है। याची के अधिवक्ता डा. सूरत सिंह ने अदालत को बताया कि सरकार ने किसानों की जमीन के अधिग्रहण के बदले उन्हें बहुत ही कम राशि दी है, जबकि वह खुद जमीन के बदले उन्हें दिए जाने वाले प्लाटों का मूल्य कई गुना वसूल रही है। यह सरासर संसदीय कमेटी की सिफारिश का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्ष-2006 में उनके गांव के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। मुआवजा राशि के साथ-साथ यह भी तय किया गया था कि उनसे अधिग्रहित की गई जमीन पर बनने वाली रोहिणी आवासीय योजना में मुआवजा राशि की कीमत पर ही प्लाट भी दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस अधिग्रहण के बदले किसानों को जो प्लाट दिए जा रहे हैं, उनका मूल्य डीडीए कई गुना ज्यादा वसूल रहा है। ऐसे में गरीब किसान अपने लिये प्लाट नहीं ले पा रहे हैं। याची ने अदालत से आग्रह किया कि संबंधित पक्षों को निर्देश दिया जाए कि कमेटी की जुलाई-1989 की अनुशंसाओं को लागू किया जाए। इतना ही नहीं किसानों को उसी दर पर प्लाट दिए जाएं, जिस पर जमीन का अधिग्रहण हुआ है।