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दिल्ली में कहीं लंदन की कहानी न दोहराए स्मॉग

Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
New Delhi
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नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर की आबोहवा साफ रखने के बेशक इंतजाम किए गए हैं, लेकिन फिलहाल दिल्ली-एनसीआर का दम घुट रहा है। विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर कारगर कदम नहीं उठाए गए तो हालात 1952 के लंदन के स्मॉग जैसे बन सकते हैं, जिसमें एक सप्ताह में 4,000 लोगों की मौत हो गई थी। सेंटर फॉर साइंस (सीएसई) ने कहा है कि इसे महज मौसमी घटना मानकर खारिज नहीं किया जा सकता।
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माना जा रहा है कि नीलम तूफान और मैदानी इलाकों के धुएं से दिल्ली सहित पूरा एनसीआर धुंध की चपेट में। सीएसई का मानना है कि धुंध फैलाने में इससे कहीं ज्यादा भूमिका घरेलू प्रदूषण की है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2000 की अपेक्षा 2011 में पीएम (हानिकारक कण) 10 का स्तर 47 फीसदी और नाइट्रोजन डाईआक्साइड 57 फीसदी ज्यादा है। यानी इस बीच पीएम की मात्रा 191 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर से बढ़कर 281 हो गई। वहीं नाइट्रोजन डाई आक्साइड 41.8 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर से बढ़कर 66 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर हो गई। यही वजह है कि आज दिल्ली का स्मॉग खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सीएसई की एक्जक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता रायचौधरी के मुताबिक यह दु:खद है कि सेहत का दुश्मन स्मॉग को मौसम का घटनाक्रम बताकर टाल दिया जा रहा है। ऐसे हालात में विश्व के दूसरे देशों की सरकारें चेतावनी जारी करती हैं और आपातकालीन उपाय अपनाए जाते हैं। 1952 के लंदन के स्मॉग (4000 लोगों की मौत हो गई थी) के बाद वहां हालात इसीलिए सुधरे कि प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीति तैयार की गई। लेकिन हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं।

अन्य देशों में अपनाए गए तरीके
पेरिस : प्रदूषण का स्तर ऊंचा होते ही चालकों को ट्रिप रद्द करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन, कार पूल जैसे दूसरे तरीकों से यात्रा करने को कहा जाता है। साथ ही इस दौरान उद्योग बंद किए जाते हैं।
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मैक्सिको: यहां तीन चरणों में प्रदूषण नियंत्रित करने की कोशिश होती है। पहले चरण में औद्योगिक प्रदूषण को घटा कर 30-40 फीसदी नीचे लाया जात है, सरकारी वाहनों का इस्तेमाल 50 फीसदी कम कर दिया जाता है, प्रदूषण फैलाने वाले दूसरे वाहनों पर लगती है रोक। दूसरे चरण में स्कूल बंद कर दिए जाते हैं और एक दिन के वाहनों के चलने की पाबंदी की अवधि बढ़ा दी जाती है।
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बर्लिन में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को सिटी सेंटर के नजदीक चलने की अनुमति नहीं मिलती।

चेतावनी
किलर पार्टिकल पीएम 2.5 का स्तर 4-6 गुना ज्यादा है।
मंदिर मार्ग, सिविल लाइन व आरकेपुरम में नाइट्रोजन डाई आक्साइड का स्तर मानक से कहीं ज्यादा है और इनके लिए वाहन ज्यादा जिम्मेदार होते हैं।

दिल्ली के लिए सलाह
हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अब दूसरे चरण का सुधार जरूरी
सार्वजनिक परिवहन सुविधा मजबूत की जाए। साथ ही राहगीरों और साइकल सवारों के लिए जगह मिले।
एनसीआर में सपंर्क मार्गों में सुधार के साथ सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बहाल की जाए।
स्मॉग अलर्ट सिस्टम तैयार किया जाए, जिससे लोगों को सही जानकारी मिल सके।
डीजल वाहनों पर पाबंदी लगे, वाहनों के उत्सर्जन मानकों को बढ़ाया जाए।
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