नई दिल्ली। राजधानी के ऑटो चालकों ने दस हजार नए परमिट जारी करने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश डी मुरुगेसन और न्यायाधीश राजीव सहाय एंडलॉ की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई 17 अक्तूबर को तय की है। दिल्ली सरकार ने आठ अगस्त को अधिसूचना जारी करके ऑटो चालकों से पहले चरण में दस हजार परमिट के लिए आवेदन मंगाए थे। सरकार का कहना है कि दूसरे चरण में 35 हजार परमिट जारी किए जाएंगे। सरकार ने यह अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर ऑटो की संख्या 55 हजार से बढ़ाकर एक लाख करने के संबंध में जारी की थी। सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए भारतीय तिपहिया चालक संघ समेत कई संघों ने कहा है कि दिल्ली सरकार का यह निर्णय ऑटो चालकों को रोजगार के मूल अधिकार के खिलाफ है। चालक संघों का आरोप है कि चरणबद्ध तरीके से परमिट जारी करने से ऑटो फाइनेंस माफिया को परिवहन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से प्रोत्साहन मिलेगा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि परमिट जारी करने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह दिल्ली मोटर वाहन नियम का उल्लंघन है। इसमें गड़बड़ी होने की आशंका है। सुप्रीम कोर्ट के 16 दिसंबर 1997 के आदेश के बाद भी ऑटो परमिट की कालाबाजारी हो रही है।