नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजधानी में जलभराव रोकने के लिए ठोस उपाय न करने पर एनडीएमसी और एमसीडी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि वर्तमान में लगातार बारिश नहीं हो रही है जिससे जलभराव नहीं हो रहा है लेकिन यदि जमकर बारिश हुई तोे स्थिति बदतर बन जाएगी। अदालत ने जलभराव रोकने के लिए मास्टर प्लान बनाने के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि लोग 20 वर्ष इंतजार नहीं कर सकते। स्थिति से निपटने के लिए तुरंत उपाय किए जाने चाहिए। न्यायमूर्ति संजय कृष्ण कौल और न्यायमूर्ति विपिन सांघी की खंडपीठ के समक्ष एमसीडी और एनडीएमसी ने तर्क रखा कि उनके पास जलभराव की कोई शिकायत नहीं आई है। खंडपीठ ने कहा कि जब ठीक से बारिश ही नहीं हुई तो शिकायत कैसे आएगी। आपकी रिपोर्ट कुछ कहती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। खंडपीठ ने एमसीडी के तर्क पर कड़ी फटकार लगाई कि पूरा सिस्टम 1960 का है और जो स्थिति से निपटने में असफल है। यदि ऐसा है तो आप सभी पाइप बदल क्यों नहीं देते ताकि स्थिति में सुधार हो जाए। इस पर एमसीडी के अधिवक्ता ने कहा कि इसके लिस मास्टर प्लान बना रहे हैं।
अदालत ने कहा कि लोग 20 वर्ष तक इंतजार नहीं कर सकते आप समस्या से निपटने के लिए कम अवधि की योजना क्यों नहीं बनाते। आप सभी विधायी संस्थाएं हैं, लेकिन किसी में भी तालमेल नहीं है। इससे पूरा सिस्टम फेल है। कोई व्यक्ति समस्या के समाधान के लिए कितना इंतजार करेगा। इसके बाद अदालत ने सभी को तालमेल कर काम करने व प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 28 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। साथ ही, उन्हें पूरे ड्रेनेज सिस्टम का नक्शा भी पेश करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ न्यायभूमि द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है।