राजधानी में सरकारी भूमि पर बने अनधिकृत धार्मिक स्थलों को नहीं हटाए जाने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार व डीडीए को कड़ी फटकार लगाई है।
कोर्ट ने कहा कि सरकार व एजेंसी अनधिकृत भूमि की मात्रा व कीमत की अनदेखी कर रही है।
दूसरी ओर कोर्ट ने पहले से चिह्नित 27 अनधिकृत धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए सरकार व डीडीए को चार सप्ताह का समय दिया है।
जस्टिस मुरलीधर व जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ की विशेष खंडपीठ ने कहा कि भूमि सबसे कीमती संसाधन है। जबरन कब्जे वाली भूमि को वापस लेने के लिए कैसे कोई कदम नहीं उठाया गया।
सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव ने हलफनामा पेश कर अनधिकृत धार्मिक स्थलों को हटाने के संबंध में की गई कार्रवाई का ब्योरा दिया।
हलफनामे के संबंध में कोर्ट ने कहा कि इसे चतुराई से लिखा गया है और ऐसा लगता है कि छोटे भूमि खंडों को वापस लेने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठाएगी।
सरकार अतिक्रमण व अनधिकृत निर्माण को ऐसे ही बनाए रखना चाहती है।
कोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव व डीडीए के वाइस चेयरमैन को चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने व प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
बता दें कि हाईकोर्ट वर्ष 2005 से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मुद्दे की निगरानी कर रहा है।
कोर्ट ने करीब 43000 एकड़ सरकारी भूमि के अतिक्रमण पर मीडिया रिपोर्ट पर स्व संज्ञान लिया था।
इस संबंध में कोई कदम न उठाने पर कोर्ट ने जुलाई 2012 में भी दिल्ली सरकार व डीडीए को फटकार लगाई थी।