राजधानी में पार्किंग का संकट सिर्फ अव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। सड़कों और गलियों में वाहन खड़े करने को लेकर बढ़ते विवाद हत्या तक पहुंच गए हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है, पार्किंग व्यवस्था का अलग-अलग एजेंसियों में बंटा होना और पूरे शहर के लिए एक स्पष्ट, सख्त और एकीकृत नीति का अभाव है। नगर निगम, एनडीएमसी, डीडीए और मेट्रो जैसी कई एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर पार्किंग का संचालन कर रही हैं, लेकिन इनके बीच न तो समन्वय है और न ही एक समान नियम। नतीजा यह है कि राजधानी की सड़कें धीरे-धीरे नो-मैन्स-लैंड में बदलती जा रही हैं, जहां नियम से ज्यादा ताकत और विवाद हावी हो रहे हैं।
पार्किंग क्षमता का कोई एकीकृत आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि यह व्यवस्था अलग-अलग एजेंसियों में बंटी हुई है।
सड़क के दोनों ओर गाड़ियां खड़ी रहती हैं, जिससे इलाके में जाम लग जाता है। इलाके में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, जिससे वाहन चालक कहीं भी अपने वाहन खड़े कर देते हैं।-प्रदीप अरोड़ा, ईस्ट नत्थू कॉलोनी
मंडावली स्टेशन, ऊर्जा विहार सोसाइटी और श्रीराम चौक पर वाहनों का जमावड़ा रहता है। पार्किंग न होने से मंडावली स्थित साकेत ब्लॉक में गलियों में भी वाहन खड़े रहते हैं।-मान सिंह पंच, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए साकेत ब्लॉक, मंडावली