एक बुजुर्ग मां के जवान बेटे की लीवर की बीमारी की वजह से मौत हो गई। जिस दिन युवक की तबीयत बिगड़ी, तो परिजन उसे डॉ. हेडगेवार अस्पताल ले गए थे। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर कोविड-19 का संदिग्ध माना और शव मॉर्चरी भिजवा दिया।
डॉक्टरों का कहना था कि कोविड-19 का टेस्ट होने के बाद ही परिवार को शव दिया जाएगा, रिपोर्ट 48 घंटे में आ जाएगी, लेकिन परिवार का आरोप है कि 12 दिन बीतने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने परिवार को शव नहीं सौंपा है।
बुजुर्ग मां अपने बेटे के शव के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है। 60 वर्षीय गीता देवी अस्पताल के डॉक्टरों पर बदसलूकी का आरोप लगा रही हैं। वहीं मामले पर अस्पताल प्रशासन कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
गीता देवी परिवार के साथ कृष्णा नगर के राम नगर स्थित राम पार्क में रहती हैं। परिवार में एक बेटा भारत कुमार है, जबकि दूसरा बेटा जितेंद्र कुमार (35) था। जितेंद्र के परिवार में पत्नी रीटा के अलावा पांच साल का एक बेटा है। जितेंद्र का एसी रिपेयरिंग का काम था। एक साल से उसे लीवर की बीमारी थी, जिसका पटपड़गंज स्थित मैक्स अस्पताल में इलाज चल रहा था।
परिवारजनों के मुताबिक, डॉक्टरों ने लीवर ट्रांसप्लांट करने की बात कह रखी थी। पिछले कुछ दिन से जितेंद्र की तबीयत ज्यादा खराब चल रही थी। 19 अप्रैल को परिवार उसे डॉ. हेडगेवार अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, शव सब्जी मंडी मॉर्चरी भेज दिया।