बाएं से दाएं.. डॉ. प्रदीप नेगी, गांधो देवी, डॉ. जियाउलहक, डॉ. अली अंसारी और चिकित्सक दंपती पृश्वी और कुसुम
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डॉ. पृथ्वी और डॉ, कुसुम, हमीरपुर : तीन साल की बेटी से दूर डॉक्टर दंपती निभा रहा फर्ज
कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में जब लोग इसके नाम से घबरा रहे थे तब स्वास्थ्य खंड भोरंज के डॉ. पृथ्वी बढ़-चढ़कर सैंपलिंग कर रहे थे। वहीं, उनकी पत्नी डॉ. कुसुम दियोटसिद्ध आइसोलेशन केंद्र की प्रभारी रहकर लोगों को उचित इलाज और परामर्श दे रही थीं। अपनी तीन साल की बेटी को उसके ननिहाल में छोड़कर इस डॉक्टर दंपती ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी और फर्ज की खातिर महीनों अपने जिगर के टुकड़े से दूर रहे। उधर, बीएमओ भोरंज डॉ. ललित कालिया ने एक साल से बिना छुट्टी लिए दिन-रात अपना फर्ज निभाया है।
अस्पताल से महज छह किलोमीटर दूरी पर घर होने के बावजूद डॉ. ललित कालिया 24 घंटे सिविल अस्पताल भोरंज के परिसर में ही रहे। इसी का परिणाम है कि भोरंज ब्लॉक पहले सैंपलिंग में उत्कृष्ट और अब वैक्सीनेशन में प्रदेशभर में अव्वल है। बीएमओ डॉ. ललित कालिया की अगुवाई में भोरंज के ही चिकित्सक डॉ. पृथ्वी ने महामारी के शुरुआती दौर में बिना डरे सबसे अधिक सैंपलिंग की। डॉ. पृथ्वी ने बताया कि उनकी पत्नी भी चिकित्सक हैं और उनकी एक तीन साल की बेटी है। जब महामारी शुरुआती दौर में थी तब उन्होंने अपनी बेटी को उसके ननिहाल में छोड़ा और ड्यूटी दी। बीएमओ डॉ. ललित कालिया ने कहा कि भोरंज ब्लॉक की टीम ने सराहनीय कार्य किया है। डॉ. पृथ्वी सैंपलिंग में बढ़-चढ़कर बिना डरे भाग लेते रहे। वह स्वयं एक साल से बिना छुट्टी लिए डटे हैं।
जरूरतमंदों के लिए सहारा बनीं शिमला की गांधो देवी
शिमला शहर के आंगनबाड़ी केंद्र नाभा में तैनात 52 साल की गांधो देवी ने महामारी में लॉकडाउन के दौरान करीब 500 कोरोना मरीजों तक मदद पहुंचाकर कोरोना योद्धा की मिसाल पेश की है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने कभी ड्यूटी देने से इनकार नहीं किया। दिन-रात लोगों की सेवा की। टूटीकड़ी निवासी गांधो देवी 33 साल से महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र में वर्कर के तौर पर सेवाएं दे रही हैं। गांधो देवी ने बताया कि कोविड काल के शुरुआती दौर में क्षेत्र में बाहरी राज्य से आए लोगों को क्वारंटीन करने की ड्यूटी लगी है।
इसी बीच उन्होंने कोरोना संक्रमित, होम क्वारंटीन मरीजों को खाद्य सामग्री से लेकर दवाइयां घरों तक उपलब्ध करवाने का कार्य बखूबी पूरा किया। क्षेत्र में अकेले रह रहे बुजुर्गों के लिए भी गांधो देवी सहारा बनीं। लॉकडाउन के दौरान सुबह सात बजे से लेकर रात आठ बजे तक दूध, सब्जियों सहित खाद्य सामग्री जरूरतमंद और गरीबों को मुहैया करवाई। गांधो देवी महिला दिवस और हिमाचल दिवस पर भी इस नेक कार्य के लिए कोरोना योद्धा के तौर पर सम्मानित हो चुकी हैं।
डॉ. अली अंसारी, जम्मू : शवों को घर तक पहुंचाया, आर्थिक मदद भी पहुंचाई
इन्हीं वारियर्स में से एक शहर के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस के इमरजेंसी स्टाफ के सदस्य अली अंसारी हैं। अली अंसारी बताते हैं कि वे कोविड मरीजों और शवों को पहुंचाने के साथ अन्य सामान्य चिकित्सा सुविधाओं में अपना योगदान दे रहे हैं। पिछले साल कोविड के चलते वे चार माह घर नहीं जा सके थे और अस्पताल में रहकर मरीजों की सेवा में जुटे रहे। इस दौरान सैकड़ों मरीजों को शिफ्ट किया गया। काजीगुंड निवासी एक कोविड संक्रमित महिला के शव को गुज्जर नगर जम्मू में दफनाने के लिए अपना सहयोग दिया। उस समय मृतक महिला के साथ सिर्फ एक सदस्य ही था, तब उसके परिवारवालों को आर्थिक मदद भी मुहैया करवाई। अंसारी कहते हैं कि इस बार पिछली बार की तुलना में कोविड संक्रमण का तेजी से प्रसार हो रहा है, जिससे चुनौतियां भी बढ़ी हैं। एसएमजीएस में ही रोजाना कई मरीज कोविड संक्रमित निकल रहे हैं। इसके लिए सबको कोविड प्रोटोकाल का सख्ती से पालन करके पूरे एहतियात बरतने चाहिए।
डॉ जियाउल हक, जौनपुर: खुद संक्रमित हुए, फिर भी ड्यूटी पर डटे रहे
जिला अस्पताल के महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. जियाउल हक की ड्यूटी कोरोना मरीजों की निगरानी में लगी है। रोजाना कितने मरीज मिल रहे हैं, वह कहां हैं, उनकी स्थिति क्या है, इसका जिम्मा वह पिछले वर्ष जनवरी से ही संभाल रहे हैं। लॉकडाउन के बाद कोरोना का संक्रमण तेज हुआ, तब भी वह अपनी ड्यूटी में लगे रहे। उन्हें परिवार से भी दूर रहना पड़ा। एक-एक मरीज की जानकारी जुटाकर संबंधित चिकित्सक व स्वास्थ्य केंद्र को अवगत कराना, उनकी दैनिक स्थिति की जानकारी लेना और सलाह देना, उनके कार्य का हिस्सा रहा। इस बीच वह खुद भी कोरोना संक्रमित हुए, मगर ठीक होते ही फिर ड्यूटी पर डट गए। दूसरी लहर में भी निगरानी का जिम्मा वह बखूबी संभाल रहे हैं।
मूल रूप से बिहार के रहने वाले डॉ. जियाउल ने बताया कि पहली लहर के दौरान जब ड्यूटी पर थे तो खतरे को भांपते हुए परिवार को गांव भेज दिया था, ताकि उनकी ड्यूटी पर कोई असर न हो और परिवार भी सुरक्षित रहे।