अब निर्धारित जोनों से बाहर ही होंगे फीडिंग पॉइंट, शेल्टर बनने के बाद में शुरू होगी ट्रांसफर प्रक्रिया
विनोद डबास
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्देशों के बाद राजधानी में लावारिस कुत्तों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए एमसीडी ने नई रणनीति तय की है। अब संस्थागत और स्कूल-कॉलेज, अस्पताल परिसर, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन सार्वजनिक इलाके और बड़े दफ्तरों में कुत्तों को खाना डालने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एमसीडी का मानना है कि जब इन संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भोजन नहीं मिलेगा तो कुत्ते स्वाभाविक रूप से दूर चले जाएंगे। वह उन स्थानों की पहचान कर रही है जहां कुत्तों को नियमित रूप से खाना खिलाया जाता है। इसके बाद इन जगहों से दूर वैकल्पिक फीडिंग जोन निर्धारित किए जाएंगे, ताकि पशु कल्याण और जन सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, फिलहाल दिल्ली में पर्याप्त डॉग शेल्टर नहीं हैं। नए शेल्टर के निर्माण में समय लगेगा, इसलिए तत्काल व्यवस्था के तौर पर निर्णय लिया गया है। सभी 12 जोनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाएं और फीडिंग स्पॉट्स की पहचान करें। अधिकारियों ने बताया कि जोनल स्तर पर एनजीओ और पशु कल्याण संस्थाओं के साथ समन्वय किया जा रहा है।
हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कुत्तों के झुंड बनने या काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। एक अधिकारी ने बताया, कई संस्थागत परिसरों के अंदर ही कुत्तों के हमले की शिकायतें मिली हैं। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई जरूरी है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर अमल
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में सभी राज्य सरकारों और नगर निकायों को निर्देश दिया था कि लावारिश कुत्तों को पहचानकर निर्धारित शेल्टरों में भेजा जाए, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। कोर्ट ने यह भी कहा था कि फीडिंग के स्थान स्पष्ट रूप से चिन्हित किए जाएं, ताकि सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो। एमसीडी ने कहा है कि पहले चरण में संवेदनशील स्थानों की पहचान और फीडिंग पॉइंट्स को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। दूसरे चरण में शेल्टर निर्माण के बाद कुत्तों को इन क्षेत्रों से हटाया जाएगा।
छह महीनों में करीब 21 हजार से अधिक मामले सामने आए
दिल्ली में बीते कुछ महीनों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। एमसीडी के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले छह महीनों में ही करीब 21 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इनमें कई घटनाएं स्कूलों, अस्पताल परिसरों और सरकारी कार्यालयों के आसपास दर्ज की गईं। यह आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं और इसी के चलते अब व्यावहारिक व ठोस नीति लागू की जा रही है।