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कोरोना काल में करियर बनाने की सोच रहे हैं तो मरीन इंजीनियरिंग हो सकता है अच्छा विकल्प

Fri, 23 Oct 2020 10:09 PM IST
Vikas Kumar अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
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मरीन इंजीनियर - फोटो : amar ujala
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कोरोना काल के चलते जहां एक ओर नौकरियों में अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं इस संकट के दौर में अच्छे करियर का सपना देखने वालों के लिए एक ऐसे पाठ्यक्रम का चुनाव जरूरी है जो भविष्य को उज्ज्वल बना सके, जिसमें नौकरियों की व्यापक संभावनाएं हों। ऐसा ही एक फील्ड है, मरीन इंजीनियरिंग। मरीन इंजीनियरिंग पेशे का अपना एक अलग ही औरा है। इसमें देश-विदेश में घूमने की सहूलियत और इंजीनियरिंग की दूसरी ब्रांचेस के मुकाबले अच्छी तनख्वाह और बहुत अच्छा लाइफ स्टाइल मिलता है। साल के छह महीने जहाज पर रहना और बाकी महीने अपनी जिंदगी जीना। यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा इस क्षेत्र में आ रहे हैं। खासकर वे युवा, जो थोड़े वक्त में अच्छा पैसा कमाने की चाह रखते हैं, जल्द से जल्द अपना करियर स्थापित करना चाहते हैं।

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वैसे, यह पेशा जितना रोमांचक है उतना ही चुनौती भरा भी है। मरीन इंजीनियर को जलपोतों के निर्माण, रख-रखाव और इंस्टॉलेशन की बड़ी जिम्मेदारी निभानी होती है। इन दिनों जहाज मॉडर्न टेक्नोलॉजी और इक्विपमेंट से लैस हैं, जिन्हें हैंडल करने के लिए मरीन इंजीनियर्स की जरूरत पड़ती है। चीफ मरीन इंजीनियर ही शिप और उसके कार्गो का इंचार्ज होता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री ट्रैफिक बढ़ने से पब्लिक और प्राइवेट शिपिंग कंपनीज में मरीन इंजीनियर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। 

अनुमान के मुताबिक, भारतीय या विदेशी जहाजों में कार्यरत सक्रिय भारतीय सीफेरर्स (नाविकों) की संख्या हाल के वर्षों में लगभग 45 प्रतिशत बढ़ी है। भारत सरकार अगले तीन से पांच वर्षों में लगभग 3.5 लाख नाविकों को नियुक्त करने की योजना बना रही है और इसका उद्देश्य शिपिंग उद्योग में नौकरियों को एक आकर्षक करियर विकल्प के रूप में बढ़ावा देना है। 
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हालांकि यहां सवाल यह उठता है कि क्या आने वाले वक्त में हमारे देश में मौजूद इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान इतने छात्रों को तैयार कर पाएंगे जो इतनी बड़ी मांग को पूरा कर पाएंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 6,214 इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान हैं। इन संस्थानों में लगभग 2.9 मिलियन छात्र नामांकित हैं। औसतन हर साल लगभग 1.5 लाख छात्रों को इंजीनियरिंग में डिग्री मिलती है। हालांकि, 20 प्रतिशत से कम अपने मूल क्षेत्र में कार्यरत हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि छात्रों में रोजगार योग्य कौशल की कमी है। छात्रों को तकनीकी तौर पर तैयार नहीं किया जा रहा है। ऐसे में  बी टेक मरीन इंजीनियरिंग और ग्रेजुएट मरीन इंजीनियरिंग ऐसे पाठ्यक्रम हैं जो छात्रों को तकनीकी रूप से तैयार कर रोजगार योग्य कौशल प्रदान करता है। 

बीटेक मरीन इंजीनियरिंग में देश में कुल उपलब्ध सीटें लगभग 3,500 प्रति वर्ष हैं। हालांकि, इस पाठ्यक्रम को लेकर छात्रों में जागरूकता की कमी है जिसके कारण इस कोर्स के लिए आवेदनों की संख्या काफी कम रहती है। दूसरी ओर, देश के अन्य इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों की तुलना में बीटेक मरीन इंजीनियरिंग के स्नातक छात्रों को रोजगार मिलने की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। 

बीटेक मरीन इंजीनियरिंग का कोर्स करवाने वाले ग्रेटर नोएडा स्थित इंटरनेशनल मेरिटाइम इंस्टिट्यूट (आईएमआई) को इंडियन रजिस्ट्रार ऑफ शिपिंग से ए1 ‘आउटस्टेंडिंग’ ग्रेडिंग मिला हुआ है। इस संस्थान में कैडेट्स को मेअर्स्क, एमएससी, फ्लीट मैनेजमेंट, पीआईएल, डोकेन्डेल शिप मैनेजमेंट, वीआर मेरिटाइम, दरिया शिपिंग, वी शिप्स एवं और भी कई प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ काम करने का अवसर मिलता है। वेतनमान आकर्षक है और अधिकांश देशों में कर-मुक्त है। 

कौन कर सकता है अप्लाई
मरीन इंजीनियरिंग में बीटेक करने के लिए अभ्यर्थी को 12वीं पास होना जरूरी है। इसके अलावा 12वीं में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथेमेटिक्स में कम से कम 60 प्रतिशत अंक होना जरूरी है। साथ ही अलग से अंग्रेजी विषय भी होना चाहिए। इसके अलावा मरीन इंजीनियरिंग में स्नातक के लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग/नेवल आर्किटेक्चर में अंतिम वर्ष में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं और 12वीं कक्षा में अंग्रेजी विषय में भी न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होना जरूरी है। 

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