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दिल्ली: धोखाधड़ी में मोना टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक गिरफ्तार, फ्लैट देने का झांसा देकर 8.28 करोड़ ठगने का आरोप

Mon, 31 Jan 2022 10:15 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

शाखा की संयुक्त आयुक्त छाया शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान भेरा एंक्लेव, पश्चिम विहार निवासी तजिंदर पाल सिंह सेतिया के रूप में हुई है। वर्ष 2018 में कीर्ति नगर निवासी अरुण खेड़ा व उनके परिवार के पांच सदस्यों ने शाखा में धोखाधड़ी की शिकायत की।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
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विस्तार
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पंजाब के जीरकपुर में फ्लैट देने का झांसा देकर 8.28 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले मोना टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया है। प्रबंध निदेशक पर आरोप है कि वह अपने बेटे और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर शिकायतकर्ताओं को 21 फ्लैटों देने के एवज में उनसे पैसे ले लिए और बाद में उन फ्लैटों को दूसरे लोगों को बेच दिया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर जांच में जुटी है।

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शाखा की संयुक्त आयुक्त छाया शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान भेरा एंक्लेव, पश्चिम विहार निवासी तजिंदर पाल सिंह सेतिया के रूप में हुई है। वर्ष 2018 में कीर्ति नगर निवासी अरुण खेड़ा व उनके परिवार के पांच सदस्यों ने शाखा में धोखाधड़ी की शिकायत की। जिसमें बताया कि वह और उसके परिजनों ने जीरकपुर, पंजाब के मोना ग्रीन्स वीआईपी रोड्स परियोजना में कुल 8.28 करोड़ रुपये में 21 फ्लैट बुक किए। परियोजना का काम मोना टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों तजिंदर पाल सिंह सेतिया, सागर सेठिया और वारंगन कुमार रल्हन के देखरेख में हो रहा था। 

शिकायतकर्ताओं ने 30 मई 2015 तक अधिकांश राशि का भुगतान कर दिया और कथित कंपनी ने शिकायतकर्ता को रसीद, चालान, स्वागत पत्र, आवंटन पत्र और खरीदार समझौते सहित विभिन्न दस्तावेज सौंप दिए। कंपनी को फ्लैटों का आवंटन दिसंबर 2015 तक करनी थी। लेकिन तय समय पर कंपनी ने फ्लैटों का आवंटन नहीं किया। काफी संपर्क करने के बावजूद कंपनी के निदेशकों ने शिकायतकर्ताओं को कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद एक शिकायतकर्ता जतिंदर खेड़ा ने परियोजना स्थल का दौरा किया। वहां पर वह यह देखकर चौक गए कि सभी फ्लैटों को पूरा कर लिया गया था और खरीदारों को विभिन्न फ्लैटों का कब्जा दे दिया गया है। 
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कुछ फ्लैट जो शिकायतकर्ताओं के लिए थे, उसे भी अन्य लोगों को बेच दिए गए हैं। कुछ प्लैट में लोग रह रहे थे तो कुछ फ्लैटों के मुख्य दरवाजे के बाहर खरीदारों के नेम प्लेट लगे थे। पुलिस को जांच के दौरान जो साक्ष्य मिले उस आधार पर पता चला कि आरोपी कंपनी और उसके निदेशकों ने शिकायतकर्ताओं से 21 फ्लैटों की पूरी रकम ले लिया और बाद के उसी फ्लैट को अन्य खरीदारों को बेचकर धोखाधड़ी की। शिकायतकर्ताओं के पास से पुलिस को भुगतान के रसीद मिले। जिससे इस बात का खुलासा हुआ कि शिकायतकर्ताओं ने फ्लैटों को खरीदने के लिए कंपनी को भुगतान किया था। 

निदेशकों के धोखाधड़ी में शामिल होने का खुलासा होने के बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की और तकनीकी मदद से 30 जनवरी को प्रबंध निदेशक तेजिंदर पाल सेतिया को जीरकपुर पंजाब से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी जाट कॉलेज हिसार हरियाणा से स्नातक करने के बाद अपने बहनोई के साथ दिल्ली आ गया। उसका बहनोई दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलिंग करता था। 1987-2012 तक आरोपी भेरा एन्क्लेव, पश्चिम विहार में सेतिया प्रॉपर्टीज के नाम से प्रॉपर्टी डीलिंग का काम किया। इसके बाद वह बिल्डर बन गया और अपनी कंपनी के जरिए जीरकपुर के आस पास फ्लैटों का निर्माण करने लगा।

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