अदालत ने एक महिला जज के बच्चों को जान से मारने की धमकी देने वाले मुल्जिम व कोर्ट के एक पूर्व कर्मचारी को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने कहा कि जज के मन में डर पैदा कर न्याय व्यवस्था को प्रभावित कर अक्षम्य अपराध है।
मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट डॉ. पंकज शर्मा ने दोषी शिव शंकर प्रसाद के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया कि उसने अपनी नौकरी खो दी थी। इससे समाज में अपमान का सामना करना पड़ा था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी का अपराध एक घिनौना कृत्य है, जिसने न्याय की धारा को प्रभावित किया है। न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के बीच विश्वास की कमी भी पैदा की है। दोषी द्वारा किए गए अपराध से इस तरह निपटने की जरूरत है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
पेश मामले के अनुसार घटना के समय दोषी अहलमद के रूप में काम कर रहा था। उसे संबंधित न्यायाधीश के परिवार से संबंधित कुछ मुद्दों के बारे में पता चला। उसने जबरन वसूली के लिए धमकी भरे संदेश भेजकर एक अपराधी की तरह काम किया। अदालत ने कहा कार्यस्थल ट्रस्ट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दोषी ने अपने मालिक के भरोसे का दुरुपयोग किया। उसने बच्चों की मौत का डर दिखाकर पैसे निकालने की भयावह योजना बनाई।