नई दिल्ली। अन्य विकासशील और विकसित राष्ट्रों की तुलना में जीडीपी के अनुपात में बेहद कम टैक्स संग्रह होना भारत की प्रमुख आर्थिक चुनौती है। एक राष्ट्र के रूप में विकसित होने के लिए इस पर काम करने की जरूरत है। इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह बातें आईसीएआई (चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।
इस सम्मेलन का विषय था 2021 में सामाजिक आर्थिक उत्प्रेरक के रूप में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका। उपमुख्यमंत्री सम्मेलन में ऑनलाइन शामिल हुए। उन्होंने राष्ट्र निर्माण की दीर्घकालिक प्रक्रिया में टैक्स की भूमिका को अहम बताया। व्यवसायी और पेशेवर लोग वित्तीय सलाह के लिए सीए पर ही भरोसा करते हैं। इसलिए हमें अपने दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों में सीए समुदाय को शामिल करना जरूरी है।
उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि हम ऐसे पेशेवर निकायों की मदद से युवाओं को यह विश्वास दिला सकते हैं कि व्यवसाय शुरू करना उतना मुश्किल नहीं है, जितना इसे समझा जाता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली और देश दोनों के विकास के लिए उद्योग और व्यापार संबंधी नए विचारों की आवश्यकता है। दिल्ली में लगभग 40, 000 सीए हैं और लगभग 1.5 लाख छात्र चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई कर रहे हैं।