स्वास्थ्य सचिव संजीव खैरवार ने बताया कि ई सिगरेट और उससे जुड़े उत्पादों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। कोर्ट में जवाब दाखिल कर रहे हैं।
जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे। हालांकि जानकारों की मानें तो इन उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर नियंत्रण की कोई पॉलिसी नहीं है। पिछली बार भी सरकार ने यही दावे किए थे, लेकिन सुधार न होने पर कोर्ट ने हाल ही में फटकारते हुए दोबारा जवाब मांगा है।
दिल्ली से लेकर केंद्र तक लिखा पत्र, लगना चाहिए नियंत्रण
वालंटरी एसोसिएशन ऑफ ट्रेड रिप्रजेंटेटिव ऑफ ईएनडीएस इन इंडिया (ट्रेंड्स) की कन्वीनर प्रवीण रिखी बताती हैं कि वे इसी माह दो बार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस बाबत अपनी मांग रखने का प्रयास कर चुकी हैं, लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। रिखी का मानना है कि इन उत्पादों पर प्रतिबंध की जगह नियंत्रण होना चाहिए और सख्ती के साथ लागू कराना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने पूछा था, क्या है ये उत्पाद
दिसंबर 2017 में राज्यसभा में बतौर सभापति उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने पहले ही दिन ई सिगरेट के बारे में पूछा था। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए स्कूली बच्चों तक में प्रसिद्ध होने की बात कही थी। इस पर तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ठोस पॉलिसी बनाने का वादा किया था। मंत्रालय की ओर से कवायद शुरू हुई। फिलहाल मंत्रालय पूरी तरह से इन उत्पादों पर प्रतिबंध के पक्ष में है।र्भय