लेफ्ट यूनिटी (आइसा, एसएफआई, एआईएसएफ, डीएसएफ) से अध्यक्ष पद की उम्मीदवार आईसी घोष ने पत्रकार गौरी लंकेश और विद्वान कलबुर्गी के विचारों से समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि वे अखलाक, जुनैद और पहलू खान को नहीं भूलेंगे, जिनकी अलग-अलग घटनाओं में भीड़ ने कथित तौर पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। पूंजीवादी बल पूरे विश्व में दक्षिणपंथियों के उद्भव को प्रोत्साहित कर रहे हैं। ‘हम धन-बल के आधार पर लड़े गए और जीते गए चुनावों को चुनाव नहीं मानते हैं। इसके अलावा आरटीआई कानून और ट्रांसजेंडर अधिकार विधेयक को कमजोर करने का सरकार पर आरोप लगाया और कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया।
कश्मीरियों और असमियों को सलाम : बापसा
बिरसा आंबेडकर फूले छात्र संगठन (बापसा) उम्मीदवार जितेंद्र सुना ने ‘जीतेगा जितेंद्र’ के नारों के बीच मंच संभाला। उन्होंने अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे कश्मीरियों को सलाम करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की और साथ ही असमियों को भी सलाम किया, जो अपनी नागरिकता के लिए लड़ रहे हैं। सुना ने कहा कि वह मजदूर थे और उनकी प्रेसिडेंशियल डिबेट में उनकी जिंदगी का संघर्ष दिखता है। दक्षिणपंथियों और वामपंथियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा डर का माहौल बना रही है।