साकेत ने कहा कि मुआवजा दिया जाना चाहिए। यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस गलत था और इसका पुनर्निर्माण होना चाहिए। इससे पहले शनिवार रात को जेएनयू छात्रसंघ और आइसा ने राम नाम की डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण किया था।
फांसीवाद और मनुवाद से आजादी की माग
आइसा सदस्यों ने इस दौरान फिर आजादी की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने फांसीवाद, मनुवाद से लेकर कई अन्य मुद्दों पर आजादी की मांग रखी। इस दौरान कुछ छात्रों ने कश्मीर मुद्दा भी उठाया।
बयान पर जेएनयू छात्रसंघ भी दो हिस्सों में बंटा
जेएनयू छात्रसंघ के उपाध्यक्ष साकेत मून के अयोध्या विवादित ढांचा विध्वंस मामले पर दी गई टिप्पणी और बयान से छात्रसंघ दो हिस्सों में बंट गया है। जेएनयू छात्रसंघ के महासचिव सतीशचंद्र यादव ने कहा है कि यह साकेत का विचार होगा। जेएनयू छात्रसंघ ने ऐसी कोई मांग नहीं रखी है।
भगवान श्रीराम मंदिर मामले में कैंपस में जेएनयू छात्रसंघ और आइसा जिस तरह से सांप्रदायिक सौहार्द खराब करने में लगे है, वह गलत है। भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण पर ऐसे सवाल उठाना गलत है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन पर रोक लगाई है। इसके बाद भी आयोजन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का सम्मान करते हैं, इसलिए कोई हंगामा नहीं करेंगे।
- शिवम चौरसिया, अध्यक्ष, एबीवीपी जेएनयू इकाई:
वीडियो से छात्रों की पहचान कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी
जेएनयू प्रशासन ने सोमवार आधी रात भगवान श्रीराम मंदिर मामले में आयोजित कार्यक्रम पर बेशक अभी तक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन वीडियो सिक्योरिटी ने एकत्रित कर लिए हैं। इसके माध्यम से आयोजकों से लेकर विवादित टिप्पणियां देने वाले छात्रों की पहचान की जाएगी।
इसके आधार पर डीन ऑफ स्टूडेंट संबंधित स्कूल और सेंटर के अलावा हॉस्टल वार्डन को ऐसे छात्रों के नाम की सूची भेजेगा। इसके आधार पर उन्हें नोटिस जारी होगा। उसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। दरअसल विश्वविद्यालय प्रशासन ने शनिवार को छात्रों के नाम नोटिस जारी किया था। इसमें साफ लिखा था कि कैंपस में ऐसे किसी भी कार्यक्रम के आयोजन की मंजूरी नहीं दी गई है। क्योंकि ऐसे कार्यक्रमों से संप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है।