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Delhi News: निजी स्कूलों को 15 जुलाई तक शुल्क विनियमन समिति बनाना अनिवार्य

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नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई, स्कूल की मान्यता भी हो सकती है रद्द : आशीष सूद
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मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने पर स्कूलों के खिलाफ सरकार की सख्ती

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। सभी निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों को 15 जुलाई तक स्कूल स्तरीय शुल्क विनियमन समिति का गठन अनिवार्य रूप से करना होगा। दिल्ली सरकार ने इस संबंध में सभी स्कूलों को अनिवार्य रूप से इस समिति के गठन के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने यह व्यवस्था दिल्ली स्कूल शिक्षा शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता अधिनियम 2025 के तहत लागू की है। जिसका उद्देश्य निजी स्कूलों में फीस निर्धारण की प्रक्रिया को पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायसंगत बनाना है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को किफायती और सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, व्यापार का नहीं इसलिए अभिभावकों पर मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने या छिपे हुए शुल्कों के जरिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जाएगी।
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पूर्ण पारदर्शिता के लिए स्कूल स्तरीय शुल्क विनियमन समिति में शामिल किए जाने वाले पांच अभिभावक प्रतिनिधियों और तीन शिक्षक प्रतिनिधियों का चयन सार्वजनिक रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ ड्रॉ ऑफ लॉट्स के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए स्कूलों को लॉटरी से कम से कम सात दिन पहले सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी। पूरी प्रक्रिया की निगरानी सरकार द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक करेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्कूल पर आर्थिक दंड, स्कूल की मान्यता निलंबित या रद्द करना और आवश्यकता पड़ने पर स्कूल को टेकओवर (अधिग्रहण) भी किया जा सकता है। निर्देशों में कहा गया है कि स्कूलों को 31 जुलाई तक आगामी तीन वर्षों के शुल्क प्रस्ताव समिति के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। इन प्रस्तावों के साथ पिछले तीन वर्षों के चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित ऑडिटेड वित्तीय विवरण देना अनिवार्य होगा। बिना ऑडिट या स्वयं प्रमाणित दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
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