धमाके के बाद पूरे इलाके को सील कर दिल्ली पुलिस के अलावा अन्य एजेंसियों ने जांच पड़ताल की थी। छानबीन करने पर पता चला कि घटना के समय दूतावास के पास दो लाल रंग की बाइक सवार युवकों को देखा गया था। जिन्होंने कार पर कुछ चिपका दिया था। उसके थोड़े देर के बाद धमका हो गया था।
जांचकर्ताओं को बम को चिपकाने के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरण में चुंबकीय टुकड़े मिले थे लेकिन इसके बारे में सीसीटीवी फुटेज से ज्यादा मदद नहीं मिल सकी। इस बम हमले में इस्राएली राजनयिक की पत्नी, उनका ड्राइवर और पास की कार में बैठे दो और लोग घायल हो गए थे।
स्वतंत्र पत्रकार को गिरफ्तार किया था-
दिल्ली पुलिस ने घटना के करीब एक महीने बाद एक स्वतंत्र पत्रकार सैयद मोहम्मद काजमी को गिरफ्तार किया था और दावा किया था कि वह एक ईरानी समाचार एजेंसी के लिए काम करता है। 50 साल के काजमी को बम हमले से जुड़े एक संदिग्ध के साथ संपर्क रखने के अंदेशे में गिरफ्तार किया है. यह संदिग्ध वह शख्स है जिसके बारे में पुलिस का मानना है कि उसने चुंबक बम को राजनयिक की कार में लगाया था। हालांकि तलाशी के दौरान पत्रकार के घर की तलाशी लेने से कुछ नहीं मिला था। बाद में पत्रकार को छोड़ दिया गया था और चार विदेशी लोगों की भूमिका सामने आई थी। ये लोग ईरान के बताए जा रहे थे, जो भारत में आए थे। पुलिस ने इस मामले में तभी चार्जशीट दाखिल कर दी थी।