किसान आंदोलन में महिलाओं ने भी भरपूर सहयोग दिया है। दिल्ली की सीमाओं पर 100 दिन से डटे आंदोलनकारी किसानों के लिये उन्होंने केवल लंगर ही तैयार नहीं किया है। बल्कि मंच के माध्यम से देशभर की महिलाओं को कृषि कानूनों के खिलाफ लामबंद करने का प्रयास किया, जब किसान आंदोलन कमजोर पड़ गया तो गांव-गाव जाकर लोगों से दिल्ली चलने का आह्वान भी किया है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर वह अपनी ताकत का एहसास कराने दिल्ली में जुट रही हैं। पंजाब और हरियाणा के सभी ब्लॉकों से महिलाओं का जत्था धीरे-धीरे दिल्ली के लिये रवाना हो रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने के बाद 8 मार्च को महिलाएं जंतर-मंतर पर जुटने की तैयारी में हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जंतर-मंतर पर पहुंचकर महिलाएं किसान आंदोलन में जान गंवा चुके किसानों को श्रद्धांजलि देना चाहती हैं। साथ में केंद्र सरकार से कृषि कानूनों की वापसी के लिए मांग करना चाहती हैं।
टीकरी बॉर्डर पर सक्रिय किसान सोशल आर्मी के मुताबिक इसके लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति मांगी गई है। जंतर-मंतर पर 150 महिलाओं के लिए मंजूरी मांगी गई है। दूसरी तरफ शुक्रवार को संगरूर जिले के भवानीगढ़ ब्लॉक से हजारों महिलाएं ट्रैक्टर पर सवार होकर दिल्ली रवाना हुईं।
किसान सोशल आर्मी के मुताबिक पंजाब के सभी ब्लॉकों से महिलाओं का जल्था दिल्ली के लिये रवाना हो रहा है। अगले दो दिन में हरियाणा से भी बड़ी संख्या में महिलाएं दिल्ली पहुंचेंगी। किसान सोशल आर्मी के संयोजक अनूप सिंह चानौत ने बताया कि लगभग 20 हजार महिलाएं केवल टीकरी बॉर्डर पर जुटेंगी। इसी तरह से बाकी आंदोलन स्थलों पर भी महिलाओं का जमावड़ा होगा।
भारतीय किसान यूनियन के नेता रामराजी धुल ने बताया कि किसान आंदोलन जब से चल रहा है, तब से अधिकतर महिलाओं ने खेती-किसानी का काम संभाला हुआ है। इन महिलाओं ने बीच-बीच में दिल्ली की सीमाओं पर आकर अपनी अहमियत से रूबरू कराया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अब महिलाएं दिल्ली आ रही हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान लाखों महिलाएं दिल्ली में जुटेंगी।