कहते हैं उम्र जज्बे के आड़े नहीं आती। अगर हौसला हो तो बाईपास सर्जरी और सिर के टांके भी दौड़ लगाने से रोक नहीं पाती हैं। यही चरितार्थ कर रही हैं नजफगढ़ के मलिकपुर गांव की 95 वर्ष की भगवानी देवी। महिलाओं के लिए एक मिसाल और सफलता की नई इबारत लिख चुकी भगवानी देवी अब इस माह पौलेंड में होने वाली इंडोर मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए तैयार हो रही हैं। दादी के इन कीर्तिमानों में उनके द्रोणाचार्य हैं राजीव गांधी खेल पुरस्कार से सम्मानित पोता विकास डागर।
भगवानी देवी की वर्ष 2007 में बाईपास सर्जरी हुई थी। बावजूद उन्होंने दिसंबर 2021 में परिवार से विभिन्न प्रतियोगिता में खेलने की इच्छा जताई। परिवार ने उनकी उम्र को देखकर शुरुआत में तो मना किया लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे सब हार गए।
भगवानी देवी ने 24.74 सेकंड में पूरी की थी 100 मीटर की दौड़
भगवानी देवी के पोते विकास डागर बताते हैं कि फिनलैंड में आयोजित हुई 90-94 वर्ष आयु वर्ग में वर्ल्ड मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ में विश्व चैंपियनशिप और नेशनल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक व गोला फेंक और डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। 100 मीटर की दौड़ उन्होंने 24.74 सेकेंड में पूरी की जो कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।
रोज चार किलोमीटर दौड़ती हैं
फरवरी में कोलकाता में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के समय उनके सिर में पांच टांके थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 14 से 18 फरवरी तक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और 23 फरवरी को उनके टांके कटे। अब भगवानी देवी का अगला लक्ष्य पौलेंड में होने वाली प्रतियोगिता है। विकास डागर बताते हैं कि बचपन में उनकी दादी को खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन उनके मन में कहीं खेलने का जज्बा था। वह मुझे खेलता देखती तो अचंभित और रोमांचित होती। तब हमें लगा कि वह खेल सकती हैं। विकास बताते हैं कि इस उम्र में उनकी इच्छा शक्ति गजब की है। हम उन्हें खास ट्रेनिंग नहीं देते बस सुबह शाम तीन से चार किलोमीटर दौड़ती हैं।