डबलिन में भारत का 77वां गणतंत्र दिवस मनाया गया
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आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्र ने डबलिन स्थित भारतीय दूतावास परिसर में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया और भारत की राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन को पढ़ा। प्रतिकूल मौसम की चुनौतियों के बावजूद, इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के सदस्यों और आयरलैंड के मित्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस दौरान राजदूत मिश्र ने संबोधित करते हुए भारत और आयरलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों, विशेषकर व्यापार में हुई प्रभावशाली वृद्धि पर प्रकाश डाला। पिछले वर्ष यह व्यापार 18 अरब अमेरिकी डॉलर (16 अरब यूरो) को पार कर गया, जो 2021 के लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में एक महत्वपूर्ण उछाल है। उन्होंने दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सद्भावना को मजबूत करने में लगभग 100,000 भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना की।
आयरलैंड में मनाया गया भारत का 77वां गणतंत्र दिवस
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राजदूत ने समुदाय के भारत और भारतीय संस्कृति के साथ मजबूत जुड़ाव की प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से समुदाय की महिलाओं के योगदान पर जोर दिया, जो न केवल आर्थिक रूप से पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, बल्कि अपनी भाषाओं, नृत्य, कला और संगीत की परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और सिखाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना का प्रसार
एम्बेसडर मिश्र ने समुदाय को भारत सरकार के 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' दृष्टिकोण से अवगत कराया, जो दूतावास की सांस्कृतिक और सामाजिक पहलों का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने दूतावास द्वारा आयोजित 23 सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य भारत के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक समृद्धि, व्यापार और पर्यटन की क्षमता को प्रदर्शित करना था। इन आयोजनों की सफलता विभिन्न राज्यों के कलाकारों और समुदाय के सदस्यों के सक्रिय सहयोग पर निर्भर थी।
व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर
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संविधान के मूल्यों और कर्तव्यों पर बल
राजदूत ने गणतंत्र दिवस मनाने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसका वास्तविक अर्थ भारतीय संविधान में निहित मूल्यों और आदर्शों के प्रति पुनः समर्पण में निहित है। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की नींव और नागरिकों के अधिकारों व स्वतंत्रता के स्रोत के रूप में संविधान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अधिकार तभी बने रह सकते हैं जब नागरिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।