कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को 124 दिन पूरे हो गए है। अपनी मांग को लेकर किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। रविवार को होलिका दहन के मौके पर किसानों से तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर होली मनाई। इस मौके पर बॉर्डर पर भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।
गाजीपुर बॉर्डर पर सुबह से ही किसान होलिका दहन की तैयारियों में लगे हुए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से किसानों का यहां पहुंचने का सिलसिला जारी था। बॉर्डर के प्रमुख चौराहे पर होली रखी गई थी। पूर्व निर्धारित समय के अनुसार भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने शाम 7 बजे होलिका दहन किया। इस दौरान काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।
बुलंदशहर के भटोना गांव के सदस्यों की टोली द्वारा पारम्परिक होली के गीत, ढ़ोल और नगाड़ों बजाए जा रहे थे, जिनपर किसान ठिरक रहे थे। होलिका दहन के बाद राकेश टिकैत ने कहा कि देशभर में किसानों की पंचायत चल रही है, लेकिन सरकार किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है।
कानूनों की प्रतियों को जलाकर सरकार को यह संदेश दिया गया है कि अन्नदाता इन कानूनों को नहीं मानते हैं। जबतक सरकार इन्हें वापस नहीं लेगी। वह दिल्ली की सीमाओं पर हटे रहेंगे।उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अभी लंबा चलेगा। जिस प्रकार किसान यहां सर्दियों में डटे रहे थे। उसी प्रकार गर्मियों में भी रहेंगे।