उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जब कोई न्यायाधीश किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता है तो किसी भी पक्ष को इसके कारणों के बारे में जानने या सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कोई न्यायाधीश मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता है तो इसका सम्मान किया जाना चाहिए। चाहे वह इस तथ्य का खुलासा करता है या नहीं।
न्यायमूर्ति आशा मेनन ने अपने फैसले में कहा कि मामले से स्वयं को अलग करने के कारणों का खुलासा करने के लिए नहीं कहा जा सकता। उन्हें खुलासा करने के लिए मजबूर करना न्याय देने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप होगा। अदालत ने कहा मामले की सुनवाई होने के कारणों का खुलासा करना है या नहीं, संबंधित न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करता है। उच्च न्यायालय ने 16 जुलाई 2020 को पारित विशेष न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।