नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने एक याचिका में ‘टॉम, डिक और हैरी’ जैसे वाक्य प्रयोग करने पर नाराजगी जताते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका में इस तरह की खिचड़ी भाषा के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती। याचिका में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) से संबंधित शिकायत उठाई गई थी।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि इस मामले में याची स्वयं व्यक्तिगत रूप से पेश हुआ है। ऐसे में वे उस पर जुर्माना नहीं लगा रहीं। अदालत के रवैये को देख याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली। अदालत ने उसे छूट दी कि वह याचिका को अच्छे तरीके से तैयार कर पुन: दायर कर सकता है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान याचिका को देखने के बाद कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने खुद ही याचिका तैयार की है। एक पैराग्राफ को देखने से यह लगता है कि याचिका में आम बोल-चाल की भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इस पैराग्राफ में लिखा हुआ है: ‘...द एए/एनसीएलटी, किसी व्यक्ति को ‘टॉम, डिक और हैरी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकि नियम इसकी अनुमति नहीं देते। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में एनसीएलएटी के खिलाफ शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि अधिकरण ने गलत प्रक्रिया अपनाई है।