नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (आईसीएआई) द्वारा 15 करोड़ रुपये पीएम केयर्स में देने के विरोध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से बुधवार को इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह जनहित याचिका संस्थान के अध्यक्ष के खिलाफ प्रेरित याचिका प्रतीत होती है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि जनहित याचिका कैसे दायर की जा सकती है जब आईसीएआई के सदस्य निधि के हस्तांतरण से दुखी नहीं है। अदालत ने पूछा कि अगर आईसीएआई के सदस्य योगदान देकर खुश हैं तो जनहित याचिका का कोई आधार नहीं है।
पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि याचिका वापस ले लें या हर्जाने के साथ इसे खारिज किए जाने के लिए तैयार रहें। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। पीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। यह याचिका पेशे से पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता नवनीत चतुर्वेदी की ओर से दायर की गई थी।
याचिका में अप्रैल में पीएम केयर्स फंड में 15 करोड़ रुपये देने के अलावा, आईसीएआई ने अपने सदस्यों के योगदान के जरिये छह करोड़ रुपये और दिए जाने की बात कही गई। याचिकाकर्ता के मुताबिक, संस्थान द्वारा यह फैसला कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के तत्कालीन सचिव के आग्रह पर लिया गया था।