ट्वीट्स के लिए 50 लाख का हर्जाना देने के एकल-न्यायाधीश के निर्देश के खिलाफ उनकी अपील में दायर किया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस के नेता और राज्यसभा सांसद साकेत गोखले द्वारा दायर एक हलफनामे पर आपत्ति जताई। यह हलफनामा गोखले ने पूर्व राजनयिक लक्ष्मी पुरी के खिलाफ मानहानिकारक ट्वीट्स के लिए 50 लाख रुपये का हर्जाना देने के एकल-न्यायाधीश के निर्देश के खिलाफ उनकी अपील में दायर किया था।
गोखले ने हाल ही में एकल न्यायाधीश के निर्देश के अनुसार पुरी से सार्वजनिक माफी मांगी थी। मंगलवार को इस संबंध में उनके द्वारा कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया गया। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रेणु भटनागर की खंडपीठ ने शुरुआत में ही बताया कि हलफनामे में कोर्ट की कुछ मौखिक टिप्पणियों को शामिल किया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
गोखले का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने कहा, हलफनामा औपचारिक रूप से दायर नहीं किया गया है, लेकिन सहमति जताई कि मौखिक टिप्पणियों को हलफनामे में शामिल नहीं करना चाहिए था। सिब्बल ने कहा कि मैं माफी मांगता हूं। मैंने इसे नहीं देखा, न ही इसे अंतिम रूप दिया। ऐसा नहीं होना चाहिए था। रिकॉर्ड का हिस्सा न होने वाली कोई भी टिप्पणी हलफनामे में नहीं होनी चाहिए। वास्तव में, यह दायर नहीं किया गया है। पिछले साल हाई कोर्ट ने गोखले के ट्वीट्स को मानहानिकारक करार दिया था और उन्हें पुरी को 50 लाख रुपये का हर्जाना देने और टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार और अपने एक्स हैंडल पर माफी प्रकाशित करने का निर्देश दिया था।