नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजधानी के कोरोना मरीजों को अनवरत ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर अभी तक आक्सीजन का बफर स्टॉक नहीं बनाने पर दिल्ली सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है सरकार ने तरल चिकित्सीय ऑक्सीजन (एलएमओ) के भंडारण और राष्ट्रीय राजधानी में इसके वितरण को सरल बनाने के लिए कदम नहीं उठाए हैं। अदालत ने कहा इसकी बहुत आवश्यकता है और जरूरत पड़ने पर अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा सकती है।
खंडपीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह एलएमओ और ऑक्सीजन सिलेंडरों के लिए भंडारण केंद्र बनाने की विभिन्न संभावनाओं को तलाशे और उसकी रूपरेखा तैयार करने के लिए दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) की मदद ले सकती है। अदालत ने सरकार को आदेश पर अमल कर रिपोर्ट 7 मई को पेश करने का निर्देश दिया है।
पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 30 अप्रैल के आदेशानुसार ऑक्सीजन का भंडार तैयार करने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार और केंद्र दोनों की है लेकिन इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह बड़े-बड़े क्रायोजेनिक टैंकरों को रखने का स्थान तलाशे, जिससे उसे जरूरत वाली जगहों पर तुरंत भेजा जा सके। इसके लिए वह मूलभूत सुविधा तैयार करें।
पीठ ने यह बात तब कही जब एक वकील आदित्य प्रसाद ने कहा कि ऑक्सीजन की आपूर्ति को लेकर बड़े-बड़े क्रायोजेनिक टेंकर हैं और उन्हें सही जगह पर रखने की जरूरत है, जिससे ऑक्सीजन का बफर स्टॉक बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि उन टैंकरों से छोटे-छोटे टैंकर और लिक्विड ऑक्सीजन लेकर उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर दिल्ली सरकार को किसी दूसरे राज्य या केंद्र सरकार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वह टैंकर की तैनाती को लेकर सेना से मदद ले सकती है। पीठ कहा कि यह दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी है कि वह कैसे ऑक्सीजन का बफर स्टॉक बनाती है। पीठ ने वकील से कहा कि वह अपने रिसर्च एवं अन्य जानकारी को दिल्ली सरकार के साथ-साथ एमिकस क्यूरी राजशेखर राव के साथ साझा करें।