नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के नदी में वाहन गिरने से लापता इंजीनियर के परिजनों को एक साल से वेतन नहीं देने पर नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने बीआरओ को निर्देश दिया कि वह 15 जून तक लापता कर्मचारी के एक साल के बकाया वेतन की राशि का भुगतान परिजनों को करें। यह राशि उसके परिवार के नाम बैंक ड्राफ्ट जारी कर दी जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो बीआरओ के महानिदेशक इसके लिए जिम्मेदार माने जाएंगे।
न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडला और न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने कहा कि लगता है बीआरओ के अधिकारियों को अपने कर्मियों के परिवारों के प्रति दर्द नहीं महसूस हो रहा है। बीआरओ के कर्मचारी के लापता हुए एक वर्ष हो गया, लेकिन अभी तक कुछ राशि के अलावा कोई भुगतान नहीं किया गया है।
लापता इंजीनियर के याचिकाकर्ता पिता ने कहा है कि उसका बेटा बीआरओ के सीमा सड़क इंजीनियरिंग सेवा में सहायक कार्यकारी इंजीनियर के रूप में कार्यरत था। उसे लेह में मीना मार्ग के कैजुअल पेड लेबर (सीपीएल) क्वारंटाइन कैंप की निगरानी के लिए तैनात किया गया था। 22 जून, 2020 को जिस वाहन में उनका बेटा यात्रा कर रहा था, वह गहरी खाई में गिर गया और जोजिला-कारगिल-लेह मार्ग पर तेज बह रही द्रास नदी में बह गया।
उन्होंने कहा कि तब से उनके बेटे के बारे में कुछ पता नहीं चला है। उसका शव भी अब तक बरामद नहीं हो पाया है। उन्होंने याचिका दाखिल कर अपने लापता बेटे का पता लगाने और बीआरओ को याचिकाकर्ता और उसके परिवार को वित्तीय सहायता देने के लिए निर्देश देने की मांग की है।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि याचिका दाखिल करने से पहले याचिकाकर्ता को प्रतिवादियों से केवल 40 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई थी। पहले याचिका 15 अप्रैल, 2021 को दाखिल की गई थी। अदालत ने बीआरओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और उसे निर्देश दिया था कि वह चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता या उसकी पत्नी को जो भी राशि उचित समझे, उसका भुगतान करें।
इस आदेश के बावजूद राशि का भुगतान न होने पर याचिकाकर्ता ने आवेदन दायर कर कहा कि चार सप्ताह बीत जाने के बावजूद कोई भुगतान नहीं किया गया है।