नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पांच बार के पैरालंपियन निशानेबाज और अर्जुन पुरस्कार विजेता नरेश कुमार शर्मा की अपील के मामले में भारतीय पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) को अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक कमेटी (आईपीसी) के ईमेल के माध्यम से दिए गए जवाब को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक कमेटी ने जवाब में कहा था कि 24 अगस्त से शुरू होने वाले टोक्यो पैरालंपिक खेलों में भारत के एक अतिरिक्त प्रतिभागी को शामिल करना संभव नहीं है।
यह ईमेल सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय के आधार पर प्राप्त हुआ है। आदेश में कहा गया था कि प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि याची को शॉर्टलिस्ट नहीं किया जाना मनमाना है।
अदालत ने पीसीआई को टोक्यो पैरालिंपिक खेलो में शर्मा के नाम को 50 मीटर पैरा शूटर में एक अतिरिक्त प्रतिभागी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया था। उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ ने याची को पुन: हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की थी।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने मामले को स्थगित करते हुए कहा कि वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट्स के वरिष्ठ प्रबंधक टेलर एंडरसन के जवाब के रूप में किए गया ईमेल रिकार्ड पर न होने पर सुनवाई संभव नहीं है। अदालत ने मामले की सुनवाई 13 अगस्त तय की है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उसकी अपेक्षा एक अन्य उम्मीदवार दीपक को पात्रता मानदंड के अनुसार योग्य नहीं होने के बावजूद चुना गया है। पीसीआई ने यह कहते हुए जवाब दिया कि खेल के लिए सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों का चयन करने के अपने प्रयास में दीपक को संबंधित श्रेणी में उच्चतम स्कोर के साथ पाया गया।