डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आई जानकारी
44 ऐसी महिलाओं की तुलना 30 सामान्य महिलाओं से की गई, जिन्हें बाल झड़ने की समस्या नहीं थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कई महिलाओं में खून की सामान्य जांच रिपोर्ट आने के बावजूद लगातार बाल झड़ने की समस्या बनी रहती है। अब एक नए अध्ययन में इसकी अहम वजह सामने आई है। बाल झड़ने का संबंध केवल खून में हार्मोन की मात्रा से नहीं, बल्कि बालों की जड़ों और सिर की त्वचा में हार्मोन की गतिविधि से भी जुड़ा हो सकता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। अध्ययन में उन महिलाओं की जांच की गई जो लंबे समय से बाल झड़ने और बाल पतले होने की समस्या से परेशान थीं। शोध के दौरान 44 ऐसी महिलाओं की तुलना 30 सामान्य महिलाओं से की गई, जिन्हें बाल झड़ने की समस्या नहीं थी।
अध्ययन में पाया गया कि प्रभावित महिलाओं में तीन अल्फा डायोल जी नामक हार्मोन संकेतक का स्तर काफी अधिक था। यह संकेतक बालों की जड़ों में हार्मोन की गतिविधि को दर्शाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यही कारण है कि कई बार सामान्य हार्मोन जांच जैसे टेस्टोस्टेरोन, थायरॉइड और विटामिन जांच सामान्य आने के बावजूद बाल झड़ने की समस्या बनी रहती है। शोध में यह भी सामने आया कि जिन महिलाओं में इस संकेतक का स्तर अधिक था, उनके बाल अधिक तेजी से पतले हो रहे थे। साथ ही, अब तक अधिकतर जांच खून में मौजूद हार्मोन की मात्रा पर आधारित रही हैं, जबकि असली असर सिर की त्वचा और बालों की जड़ों में हो रहा होता है।
अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के प्रो. डॉ. कबीर सरदाना ने बताया कि महिलाओं में बाल झड़ने की समस्या कई बार धीरे-धीरे बढ़ती है और सामान्य जांच से इसकी सही वजह पकड़ में नहीं आती। उन्होंने कहा कि कुछ दवाएं हार्मोन के असर को कम करने में मदद करती हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से ही किया जाना चाहिए, खासकर उन महिलाओं में जो भविष्य में गर्भधारण की योजना बना रही हैं। उनके अनुसार, यह अध्ययन बाल झड़ने की समस्या को समझने और उसके बेहतर इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसे सामान्य उपचार प्रक्रिया का हिस्सा बनाने से पहले बड़े स्तर पर और शोध की जरूरत बताई गई है।